बाढ़ आपदा से निपटने सभी 33 जिलों में मॉक ड्रिल

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जमीनी स्तर पर तैयारियों को परखा गया, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों ने लिया हिस्सा

रायपुर । छत्तीसगढ़ में बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा की स्थिति से निपटने और त्वरित एवं प्रभावी राहत-बचाव कार्य सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्यभर में व्यापक स्तर पर मॉक ड्रिल एक्सरसाइज आयोजित की गई। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव शम्मी आबिदी की अध्यक्षता में प्रदेश के सभी 33 जिलों में जिला प्रशासन के नेतृत्व में यह अभ्यास संपन्न हुआ। नवा रायपुर स्थित मंत्रालय महानदी भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पूरी गतिविधि की निगरानी की गई।

मॉक ड्रिल का उद्देश्य बाढ़ जैसी आपदा के दौरान प्रशासन, राहत-बचाव दलों, सुरक्षा बलों और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना तथा वास्तविक आपदा के समय त्वरित निर्णय लेकर प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने की क्षमता को परखना था। इस दौरान जिला स्तर पर उपलब्ध संसाधनों, मानवबल और बचाव उपकरणों की तैयारियों का भी परीक्षण किया गया।

विभिन्न विभागों और सुरक्षा बलों का दिखा तालमेल

मॉक ड्रिल के दौरान बाकायदा बाढ़ की अलग-अलग संभावित परिस्थितियां निर्मित की गईं। इन परिस्थितियों के आधार पर संबंधित विभागों और सुरक्षा एजेंसियों ने राहत एवं बचाव कार्यों का अभ्यास किया। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सेना, पुलिस, होमगार्ड, नगर सेना और अग्निशमन सेवाओं के अलावा राजस्व, जल संसाधन, स्वास्थ्य, लोक निर्माण, पशुपालन और दूरसंचार विभागों के बीच सूचना के आदान-प्रदान और समन्वय की गति को परखा गया।

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अभ्यास के दौरान यह देखा गया कि आपदा की सूचना मिलने के बाद संबंधित विभाग कितनी तेजी से सक्रिय होते हैं और किस प्रकार आपसी समन्वय के साथ राहत-बचाव अभियान शुरू किया जाता है। बचाव दलों की तैनाती, संसाधनों की उपलब्धता और प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने की प्रक्रिया का भी परीक्षण किया गया।

पूर्व चेतावनी से लेकर राहत शिविरों तक की कार्यप्रणाली का अभ्यास

मॉक ड्रिल में बाढ़ की पूर्व चेतावनी जारी करने से लेकर प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया का रिहर्सल किया गया। संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित निकालने, बचाव नौकाओं एवं अन्य संसाधनों की तैनाती और राहत शिविरों के संचालन की प्रक्रिया को भी अभ्यास के माध्यम से परखा गया।

राहत शिविरों में प्रभावित लोगों के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं, स्वास्थ्य सेवाओं और मेडिकल टीमों की उपलब्धता का भी परीक्षण किया गया। आपदा की स्थिति में घायल या बीमार लोगों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने तथा आवश्यकतानुसार उन्हें अस्पताल तक पहुंचाने की कार्यप्रणाली का अभ्यास किया गया।

जिला स्तर पर त्वरित निर्णय लेने की क्षमता और मैदानी अमले की प्रतिक्रिया क्षमता की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों और राहत-बचाव दलों को वास्तविक आपदा की स्थिति में समय पर निर्णय लेने और उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग करने के लिए तैयार किया गया।

आपदा के दौरान सूचना तंत्र को मजबूत करने पर जोर

अभ्यास के दौरान सूचना के त्वरित आदान-प्रदान को विशेष महत्व दिया गया। बाढ़ की स्थिति में प्रभावित क्षेत्रों की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने, चेतावनी जारी करने और राहत-बचाव दलों को आवश्यक निर्देश देने की प्रक्रिया को परखा गया।

मॉक ड्रिल के जरिए यह भी सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया कि आपदा की स्थिति में किसी भी स्तर पर सूचना के प्रवाह में देरी न हो। विभिन्न विभागों के बीच समन्वित संचार व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में आवश्यक पहलुओं की पहचान की गई।

गैप्स को पहचानकर दूर करने पर जोर

आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव शम्मी आबिदी और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के अधिकारियों ने रायपुर जिले में आयोजित अभ्यास का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। अभ्यास का मुख्य उद्देश्य आपदा के समय किसी भी स्तर पर सामने आने वाले अंतर यानी गैप्स को समय रहते पहचानना और उन्हें दूर करना था।

इस दौरान सूचना पहुंचने में संभावित देरी, संसाधनों की कमी, राहत-बचाव दलों की तैनाती, संचार व्यवस्था तथा प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में आने वाली संभावित चुनौतियों को चिन्हांकित किया गया। इन कमियों को दूर कर भविष्य में आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया।

अधिकारियों ने कहा कि इस तरह के अभ्यास से वास्तविक आपदा के समय प्रशासनिक अमले और राहत-बचाव दलों को परिस्थितियों से निपटने में मदद मिलती है। नियमित मॉक ड्रिल से तैयारियों का आकलन करने के साथ ही व्यवस्थाओं में सुधार की गुंजाइश भी सामने आती है।

राज्य से लेकर जिला स्तर तक रही निगरानी

राज्य स्तरीय इस टेबल-टॉप और व्यावहारिक मॉक ड्रिल में प्रदेश के सभी 33 जिलों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हिस्सा लिया। नवा रायपुर स्थित मंत्रालय महानदी भवन से राज्य स्तर पर पूरे अभ्यास की निगरानी की गई। जिला प्रशासन के नेतृत्व में विभिन्न जिलों में मैदानी स्तर पर अभ्यास आयोजित किया गया।

इस दौरान संबंधित जिलों के अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में बाढ़ की संभावित परिस्थितियों के अनुसार बचाव एवं राहत कार्यों की तैयारियों का प्रदर्शन किया। इससे राज्य स्तर पर अधिकारियों को जिलों की वास्तविक तैयारियों और उपलब्ध संसाधनों की जानकारी प्राप्त हुई।

राज्य स्तरीय अभ्यास में एनडीएमए नई दिल्ली के वरिष्ठ सलाहकार रविंद्र गुरुंग, बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के डॉ. जीवन कुमार, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के उप सचिव गजेंद्र ठाकुर सहित विभिन्न अंतर-विभागीय अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े रहे। मॉक ड्रिल के माध्यम से प्रदेश में बाढ़ आपदा से निपटने की तैयारियों को और मजबूत करने तथा राहत-बचाव कार्यों को अधिक त्वरित एवं प्रभावी बनाने की दिशा में आवश्यक प्रक्रियाओं का परीक्षण किया गया।

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