क्षीरपानी जलाशय एवं भोंदा पुल पर जिला प्रशासन ने किया मॉकड्रिल

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बाढ़ जैसी आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों का किया गया अभ्यास, ग्रामीणों को सुरक्षित निकालने का किया प्रदर्शन

रिपोर्टर 🖋️ कमलेश सिंह ब्यूरो कवर्धा

कवर्धा। जिला प्रशासन द्वारा बाढ़ एवं प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में त्वरित राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आज बोड़ला विकासखंड के क्षीरपानी जलाशय एवं ग्राम भोंदा पुल के समीप मॉकड्रिल आयोजित किया गया। मॉकड्रिल के दौरान अत्यधिक बारिश से बाढ़ जैसी स्थिति निर्मित होने, जलाशय के ओवरफ्लो होने तथा ग्रामीणों के गहरे पानी में फंसने की काल्पनिक स्थिति तैयार कर राहत एवं बचाव अभियान का अभ्यास किया गया। इस दौरान राज्य स्तर की टीम भी वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से मॉकड्रिल से जुड़ी रही।

जलाशय के ओवरफ्लो और पुल क्षतिग्रस्त होने की बनाई गई स्थिति

मॉकड्रिल के तहत मैकल पर्वतीय क्षेत्र में मूसलाधार बारिश के कारण क्षीरपानी जलाशय के अधिकतम जलभराव क्षमता तक पहुंचने और ओवरफ्लो होने की स्थिति निर्मित होने की सूचना दी गई। इसके साथ ही जलाशय के गहरे पानी में चार ग्रामीणों के फंसने की काल्पनिक स्थिति बनाई गई।

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इसी दौरान तारेगांव जंगल मार्ग पर ग्राम भोंदा के समीप स्थित पुल के बाढ़ के तेज बहाव के कारण क्षतिग्रस्त होने तथा आसपास के कई गांवों का संपर्क बाधित होने की स्थिति का भी अभ्यास किया गया। इस तरह एक साथ जलाशय में ग्रामीणों के फंसने और पुल के क्षतिग्रस्त होने जैसी आपात परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों को परखा गया।

स्थिति की जानकारी मिलते ही ग्रामीणों द्वारा जिला बाढ़ कंट्रोल कक्ष को सूचना देने तथा तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू करने की प्रक्रिया का अभ्यास किया गया। सूचना प्राप्त होने के बाद अपर कलेक्टर रामप्रसाद आंचला ने स्थिति का संज्ञान लेते हुए जिला बाढ़ आपदा एवं प्रबंधन टीम में शामिल नगर सेना एवं एनडीआरएफ की संयुक्त टीम को तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना किया।

सुबह 10 बजे संयुक्त दल क्षीरपानी जलाशय पहुंचा और राहत एवं बचाव अभियान प्रारंभ किया गया। टीम द्वारा उपलब्ध संसाधनों एवं आवश्यक सुरक्षा उपकरणों के साथ जलाशय में फंसे ग्रामीणों को सुरक्षित निकालने की कार्रवाई का प्रदर्शन किया गया।

नगर सेना और एनडीआरएफ की टीम ने किया बचाव अभियान

मॉकड्रिल के दौरान नगर सेना, एनडीआरएफ के विशेषज्ञ जवानों, जिला प्रशासन के अधिकारियों तथा विभिन्न विभागों की रैपिड एक्शन टीमों ने आपसी समन्वय के साथ राहत एवं बचाव कार्यों का अभ्यास किया।

जलाशय में फंसे चार ग्रामीणों को सुरक्षित निकालने के साथ ही ग्राम भोंदा में क्षतिग्रस्त पुल के दूसरी ओर अलग-थलग हुए ग्रामीणों तक पहुंच बनाने की कार्रवाई भी की गई। वैकल्पिक पुल के माध्यम से प्रभावित ग्रामीणों को सुरक्षित बाहर निकालने तथा जरूरतमंद लोगों तक आवश्यक सहायता पहुंचाने का अभ्यास किया गया।

मॉकड्रिल के दौरान यह भी परखा गया कि किसी आपदा की सूचना प्राप्त होने के बाद संबंधित विभाग कितनी तेजी से सक्रिय होते हैं और राहत एवं बचाव दल को घटनास्थल तक पहुंचाने में कितना समय लगता है। प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने के साथ-साथ उन्हें आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की प्रक्रिया का भी अभ्यास किया गया।

विभागों के बीच समन्वय को परखा गया

इस अभ्यास के दौरान जिला प्रशासन, नगर सेना, एनडीआरएफ सहित विभिन्न विभागों की जिम्मेदारियों को स्पष्ट करते हुए वास्तविक आपदा की स्थिति में किए जाने वाले राहत एवं बचाव कार्यों का पूर्वाभ्यास किया गया। सूचना के आदान-प्रदान, टीमों की तैनाती, प्रभावित क्षेत्र तक पहुंच, लोगों को सुरक्षित निकालने तथा आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की पूरी कार्यप्रणाली को परखा गया।

मॉकड्रिल का उद्देश्य बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा के समय प्रशासन और बचाव दल की तैयारियों को जांचना तथा किसी भी संभावित आपात स्थिति में कम से कम समय में प्रभावी राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित करना रहा। अभ्यास के माध्यम से संभावित कमियों और चुनौतियों की पहचान कर आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास किया गया।

मॉकड्रिल के दौरान बोड़ला एडीएम आशुतोष शर्मा, तहसीलदार हुलेश्वर पटेल सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौके पर उपस्थित रहे। सभी संबंधित विभागों द्वारा आपदा के दौरान अपने-अपने दायित्वों के अनुरूप की जाने वाली कार्रवाई का अभ्यास किया गया।

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