आदर्श ग्राम पंचायत सेतगंगा की बदहाल तस्वीर
5-6 साल बाद भी नहीं बदली तकदीर, पेयजल, सफाई, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझ रहे ग्रामीण
मुंगेली/सेतगंगा । वर्ष 2020-21 में आदर्श ग्राम पंचायत का दर्जा मिलने के बाद विकास की उम्मीद लगाए बैठे सेतगंगा के ग्रामीण आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। मुंगेली-पंडरिया मुख्य मार्ग पर टेसुआ नदी के तट पर स्थित यह ग्राम धार्मिक, व्यवसायिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से क्षेत्र का प्रमुख केंद्र माना जाता है, लेकिन पांच से छह वर्ष बीत जाने के बाद भी यहां की तस्वीर और तकदीर नहीं बदल सकी है। मिली जानकारी के अनुसार सेतगंगा क्षेत्र में जिले का दूसरा सबसे बड़ा आम बाजार संचालित होता है, जहां पांडातराई, मुंगेली, पंडरिया, तखतपुर, लोरमी, नवागढ़, कवर्धा, बेमेतरा, कुण्डा और दामापुर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग खरीद-बिक्री के लिए पहुंचते हैं। वहीं माघ पूर्णिमा पर आयोजित पांच दिवसीय मेले में लगभग 30 से 35 हजार श्रद्धालु पहुंचकर कुंड में आस्था की डुबकी लगाते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं।
पर्यटन का दर्जा मिला, लेकिन विकास नहीं
बताया जाता है कि वर्ष 2013 में तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा सेतगंगा को पर्यटन स्थल का दर्जा दिया गया था। इसके बाद ग्रामीणों को उम्मीद थी कि गांव का तेजी से विकास होगा, लेकिन वर्षों बाद भी अपेक्षित सुविधाएं विकसित नहीं हो सकीं। गत वर्ष कुछ विकास कार्य जरूर कराए गए, लेकिन वे भी ग्रामीणों की अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतर सके।
18 दिसंबर 2025 को विष्णु देव साय का भी सेतगंगा आगमन हुआ था। इस दौरान श्रीरामजानकी मंदिर के विकास कार्यों के लिए 50 हजार रुपए तथा सामुदायिक भवन के लिए 50 हजार रुपए की राशि स्वीकृत की गई थी, लेकिन चार से पांच माह बीत जाने के बाद भी इस दिशा में कोई ठोस पहल दिखाई नहीं दे रही है।
नल-जल योजना बनी परेशानी का कारण
गांव में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी नल-जल योजना के तहत प्रत्येक घर में नल कनेक्शन तो पहुंचा दिया गया, लेकिन योजना का संचालन पूरी तरह बदहाल नजर आ रहा है। भीषण गर्मी में ग्रामीणों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार की लापरवाही और विभागीय अधिकारियों की उदासीनता के कारण यह स्थिति निर्मित हुई है।
जलकुंभी से पटा सोनारिन तालाब
ग्राम के मध्य स्थित सोनारिन तालाब में गत वर्ष लगभग 9.98 लाख रुपए की लागत से गहरीकरण और पचरी निर्माण कार्य कराया गया था, लेकिन आज तालाब जलकुंभी और गंदगी से पूरी तरह पट चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि यह तालाब निस्तारी का प्रमुख साधन था, लेकिन अब इसकी स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि तालाब में उतरना भी मुश्किल हो गया है।
इसके अलावा गांव के दो डबरी, तीन कुंड और कई नाले भी अस्तित्व खोने की कगार पर हैं, जबकि लगभग 12 कुएं पूरी तरह समाप्त हो चुके हैं।
सफाई व्यवस्था बदहाल, बीमारी फैलने का खतरा
ग्राम पंचायत क्षेत्र में साफ-सफाई की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। बाजार क्षेत्र में बने सार्वजनिक सुलभ शौचालय का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। कई वार्डों में महीनों से नालियों की सफाई नहीं हुई है, जिसके कारण गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है। बदबू और गंदगी से पूरे क्षेत्र में अस्वच्छता का माहौल बना हुआ है।
नालियों में जमा पानी मच्छरों का सुरक्षित ठिकाना बन गया है, जिससे डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सफाई व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
अधूरा सामुदायिक भवन बना खंडहर
वर्ष 2013 में ग्राम पंचायत के सामने सामुदायिक भवन निर्माण के लिए पांच लाख रुपए स्वीकृत किए गए थे, लेकिन आज तक भवन अधूरा पड़ा हुआ है। भवन अब खंडहर में तब्दील होने की कगार पर पहुंच गया है।
आंगनबाड़ी और कॉलेज की हालत भी खराब
ग्राम पंचायत के वार्ड क्रमांक 1 और 15 में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों में बिजली, पानी और खेल मैदान जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। भवनों की स्थिति भी जर्जर हो चुकी है। शिकायतों के बावजूद अब तक कोई ठोस सुधार नहीं हुआ है।
वहीं शासकीय नवीन महाविद्यालय में 13 वर्षों बाद भी स्नातकोत्तर कक्षाएं (एमए, एमएससी, एमकॉम) शुरू नहीं हो सकी हैं। इसके कारण विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे जिलों का रुख करना पड़ रहा है। जनभागीदारी समिति के मनोनीत अध्यक्ष का पद भी लंबे समय से रिक्त पड़ा हुआ है। ग्रंथालय में पद नहीं होने से छात्रों को समय पर पुस्तकें भी नहीं मिल पा रही हैं।
स्वास्थ्य सुविधाएं भी भगवान भरोसे
सेतगंगा में शासकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित है, जहां लगभग 60 से 62 गांवों के लोग इलाज के लिए पहुंचते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि अस्पताल अब रेफर सेंटर बनकर रह गया है। यहां पैथोलॉजी लैब और महतारी एक्सप्रेस जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, जिससे मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
बिजली कटौती और बैंक व्यवस्था से लोग परेशान
गांव में विद्युत सब स्टेशन होने के बावजूद दिन में चार से पांच बार अघोषित बिजली कटौती हो रही है। इससे लोगों को भीषण गर्मी में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
जिला सहकारी केंद्रीय बैंक में किसानों को अपनी ही राशि निकालने के लिए घंटों मशक्कत करनी पड़ती है। शिकायतों के बावजूद व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हो पा रहा है, जिससे किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
बस स्टैंड और यात्री सुविधाओं का अभाव
ग्राम में आज तक बस स्टैंड का निर्माण नहीं हो पाया है। यात्रियों के लिए न तो प्रतीक्षालय की सुविधा है और न ही सुलभ शौचालय की समुचित व्यवस्था। लोग धूप और बारिश में खड़े होकर बस का इंतजार करने को मजबूर हैं।
हर साल मिल रहा अनुदान, फिर भी नहीं सुधरी व्यवस्था
ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायत को प्रतिवर्ष पेयजल एवं स्वच्छता अभियान के लिए शासन की ओर से लगभग 8 से 10 लाख रुपए का अनुदान मिलता है, इसके बावजूद लोगों को पेयजल और साफ-सफाई जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान होना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से आदर्श ग्राम पंचायत सेतगंगा की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण कर मूलभूत समस्याओं के समाधान की मांग की है।

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