ससहा शराब भट्टी बनी अवैध ‘कोचियागिरी’ का गढ़: दिन-दहाड़े और रात के अंधेरे में खप रही ब्लैक की शराब
रिपोर्टर ✒️ रूपचंद रॉय
पामगढ़ (जांजगीर-चांपा)। जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ ब्लॉक अंतर्गत आने वाले ग्राम ससहा की सरकारी शराब भट्टी इन दिनों अवैध शराब कारोबारियों (कोचियों) के लिए सुरक्षित ठिकाना बन चुकी है। शासन के कड़े नियमों को ताक पर रखकर इस भट्टी के जिम्मेदार कर्मचारी ही अवैध कारोबार को फलने-फूलने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। क्षेत्र में चर्चा है कि भट्टी के सुपरवाइजर और कर्मचारियों के संरक्षण में दिन के उजाले से लेकर रात के अंधेरे तक भारी मात्रा में शराब की ब्लैक मार्केटिंग की जा रही है।
दिन में सेटिंग, रात में सप्लाई: ऐसे चल रहा खेल
स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पामगढ़ ब्लॉक के विभिन्न गांवों में सक्रिय कोचियों को शराब कहीं और से नहीं, बल्कि सीधे ससहा शराब भट्टी से ही सप्लाई की जा रही है। दिन के समय भट्टी में बकायदा ‘सेटिंग’ होती है और फिर योजनाबद्ध तरीके से रात के अंधेरे का फायदा उठाकर कोचियों तक पेटियां पहुंचाई जाती हैं।
बड़ा सवाल: आम उपभोक्ताओं को नियम और सीमा का पाठ पढ़ाने वाले भट्टी कर्मचारी, आखिर इन अवैध कोचियों पर इतने मेहरबान क्यों हैं? बिना विभागीय सांठगांठ और सुपरवाइजर के संरक्षण के इतनी बड़ी मात्रा में शराब बाहर खपना नामुमकिन है।
जगह-जगह खुले अवैध ठेके, युवा पीढ़ी गर्त में
ससहा भट्टी से मिलने वाले इस “विशेश संरक्षण” के कारण पामगढ़ क्षेत्र के गली-मोहल्लों में अवैध कोचियों ने पैर पसार लिए हैं। जगह-जगह चौराहों और किराना दुकानों की आड़ में शराब बेची जा रही है। इससे न केवल शासन के राजस्व को चूना लग रहा है, बल्कि क्षेत्र का माहौल भी खराब हो रहा है और युवा पीढ़ी नशे की गर्त में धंसती जा रही है।
जिम्मेदार मौन, कार्रवाई का इंतजार
हैरानी की बात यह है कि ।
आबकारी विभाग क्यों नहीं सीसी कैमरा का करते चेक

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