VSK से प्रमाणित उपस्थिति के बाद अन्य उपस्थिति आदेशों का कोई औचित्य नहीं, तत्काल निरस्त किए जाएँ – कृष्णकुमार नवरंग

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रायपुर/ मुंगेली । गवर्नमेंट एम्पलाइज वेलफेयर एसोसिएशन छत्तीसगढ़ के प्रांताध्यक्ष कृष्णकुमार नवरंग ने स्कूल शिक्षा विभाग एवं लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) द्वारा शिक्षकों के वेतन निर्माण एवं उपस्थिति संबंधी जारी विभिन्न आदेशों पर कड़ी आपत्ति व्यक्त करते हुए कहा है कि यदि VSK (विद्या समीक्षा केंद्र) की उपस्थिति को शासन द्वारा अधिकृत एवं प्रमाणित माना गया है, तो समानांतर रूप से अन्य उपस्थिति प्रणालियाँ लागू करने का कोई औचित्य नहीं है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में शिक्षकों को CGSchool.in पोर्टल, पाठकान पंजी में प्रतिदिन हस्ताक्षर, जिला प्रशासन द्वारा हस्ताक्षर पंजी की प्रतिदिन फोटो कॉपी उपलब्ध कराने, संकुल स्तर पर अतिरिक्त उपस्थिति, प्रत्येक माह ग्राम पंचायत के सरपंच से उपस्थिति पत्रक का प्रमाणीकरण तथा आधार आधारित उपस्थिति जैसी अनेक प्रक्रियाओं का पालन करना पड़ रहा है। इससे शिक्षकों का अमूल्य समय अनावश्यक प्रशासनिक कार्यों में व्यर्थ हो रहा है और शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है।

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श्री नवरंग ने कहा कि सरकार को शिक्षकों पर अविश्वास प्रदर्शित करने वाली बहुस्तरीय उपस्थिति व्यवस्था समाप्त करनी चाहिए। यदि VSK की उपस्थिति ही मान्य है, तो अन्य सभी समानांतर आदेशों को तत्काल निरस्त किया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये नए-नए एप एवं प्रयोगात्मक व्यवस्थाओं पर खर्च करने के बजाय विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, रिक्त पदों की पूर्ति, शैक्षणिक संसाधनों के विकास तथा विद्यार्थियों के सीखने के स्तर को बेहतर बनाने पर ध्यान देना चाहिए।

संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि कलेक्टरेट, एसडीएम कार्यालय, तहसील, निर्वाचन, लाइब्रेरी तथा आपदा प्रबंधन जैसे विभागों में संलग्न शिक्षकीय एवं गैर-शिक्षकीय कर्मचारियों को VSK में उपस्थिति दर्ज कराने के बाद भी संलग्न कार्यालयों में उपस्थित होने के लिए बाध्य किया जा रहा है, जिससे अनावश्यक भ्रम एवं प्रशासनिक कठिनाइयाँ उत्पन्न हो रही हैं।

गवर्नमेंट एम्पलाइज वेलफेयर एसोसिएशन छत्तीसगढ़ ने मुख्यमंत्री एवं स्कूल शिक्षा विभाग से मांग की है कि VSK को ही एकमात्र वैध उपस्थिति मानते हुए सभी विरोधाभासी एवं अनावश्यक उपस्थिति संबंधी आदेश तत्काल निरस्त किए जाएँ तथा शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक बोझ से मुक्त कर शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर प्राथमिकता दी जाए।

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