मवेशी बाजार वसूली में करोड़ों की धांधली…फिर निकला जांच का जिन्न…पुलिस जाँच में आई तेजी…CMO सहित कई सफेदपोश हो सकते हैं सलाखों के पीछे…नगर पालिका में बढ़ी हलचल…चेहरे में डर और शिकन…
मुंगेली । लंबे समय से ठंडे बस्ते में पड़े मवेशी बाजार वसूली घोटाले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। शुरुआती जांच में लीपापोती की कोशिशों और उच्च अधिकारियों को बचाए जाने के आरोपों के बाद, अब पुलिस महकमे ने रुख कड़ा कर लिया है। दस्तावेजों की खंगाल-पट्टी और लेनदेन की फिर से समीक्षा शुरू कर दी गई है। जिसके चलते अनुविभागीय पुलिस अधिकारी आशीष अरोरा अपनी पुलिस टीम के साथ नगर पालिका और बैंक में छानबीन शुरू कर दी हैं।
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा जोरों पर है कि जिन चेहरों को प्रशासनिक स्तर पर सुरक्षा कवच मिला हुआ था, वे अब शिकंजे से नहीं बच पाएंगे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, साक्ष्यों के आधार पर बिना किसी पक्षपात के निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी।

मुंगेली नगर पालिका का विवादों से गहरा नाता है। हमेशा किसी न किसी बातों को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहता है। कुछ साल पहले मवेशी बाजार की राजस्व वसूली में करोड़ों का घोटाला सामने आया है। 2017 से नगर पालिका के द्वारा बकरी और मवेशी बाजार को ठेका में देने के बजाए नगर पालिका के कर्मचारियों से पशु एवं बकरी बिक्री पंजीयन कराया जाता है और बाजार से बिक्री पंजीयन शुल्क वसूली किया जाता है। इन छह सालों में नगर पालिका के अधिकारी कर्मचारी एवं प्रभारियों के द्वारा उक्त पंजीयन शुल्क का खूब बंदरबांट किया गया है।

इस मामले में आरटीआई कार्यकर्ता अनिल तम्बोली उच्चाधिकारियों सहित पुलिस में शिकायत दर्ज कराया गया, जिसके बाद मामले एफआईआर दर्ज हुआ और नगर पालिका के तीन अधिकारी-कर्मचारी को जेल भी जाना पड़ा, परंतु इस मामले में उच्चाधिकारियों और तत्कालीन कोतवाली प्रभारी की भूमिका को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं जिन्होंने सीएमओ अनुभव सिंह सहित कई नेताओं, कर्मचारियों को सुरक्षा कवच पहनाते हुए उन्हें इस मामले में दोषी नहीं बनाया, जबकि कई जगह के जांच में सीएमओ के खिलाफ प्रथम दृष्टया कार्यवाही करना बताया गया।
शिकायतकर्ता ने बताया कि मवेशी बाजारों के प्रत्येक वर्ष 20 से 25 लाख में नीलामी किया जाता था। और वर्तमान समय में सप्ताह में 10 से 15 हजार रूपये की पशु व बकरी बिक्री पंजीयन शुल्क नगर पालिका के कोष में जमा किया जाता है। ऐसे ही कई सप्ताह तो इन बाजारों से आय शून्य बताया गया है । कुल मिलाकर साल भर में पांच से छह लाख करीब रूपये नगर पालिका में जमा किया जाता रहा है। इस तरह पशु पंजीयन शुल्क प्रत्येक वर्ष लगभग 20 लाख रु जो नगर पालिका के कोष में जाना चाहिए वह इन अधिकारियों कर्मचारियों और संबधित विभाग के प्रभारियों के जेब मे जा रहा है। अनिल तम्बोली ने बताया कि RTI से प्राप्त दस्तावेज के अनुसार नगर पालिका के खाते में जमा किए गए राशि की जानकारी लिया गया तो पाया कि इसमें विगत 6 वर्षों से नगर पालिका कोष को खूब लुटा जा रहा है।
अनिल तम्बोली ने मामले को उजागर करने के लिए मवेशी व बकरी बाजार में जाकर खरीददारों से पशु एवं बकरी खरीदी की पंजीयन पर्ची की पावती इकट्ठा करना शुरू किया जिसमें उसने पाया कि प्रत्येक सप्ताह 90 हजार से लेकर एक लाख रुपए से अधिक की पंजीयन शुल्क बाजार से वसूल किया जाता है और मात्र 10 से 15 हजार रुपये ही नगर पालिका के कोष में जमा किया जाता है। इस तरह प्रत्येक सप्ताह अधिकारी कर्मचारी एवं प्रभारियों के द्वारा नगर पालिका को लाखों का चूना लगाया जा रहा है।
वहीं इस मामले मे दिलचस्प पहलू ये हुआ है की शिकायत से पहले नगर पालिका राजस्व कोस मे मात्र 10 से 15 हजार ही जमा होते थे पर ज़ब से शिकायत हुआ है तब से 90 हजार से लेकर एक लाख से ऊपर की राशि हर सप्ताह जमा होने लगी जो इन अधिकारियो कर्मचारियों और नगरपालिका जनप्रतिनिधि के जेब में जा रहे थे। शिकायतकर्ता ने सभी अधिकारियो के पास 50 पन्नों में सबूत के साथ शिकायत किया है।
मुंगेली मवेशी बाजार घोटाला…जांच में आई तेजी से पालिका में हड़कंप, नेताओं और अफसरों की बढ़ीं धड़कनें…
मुंगेली नगर पालिका क्षेत्र में बहुचर्चित मवेशी बाजार वसूली में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले की जांच अचानक तेज हो गई है। एसडीओपी आशीष अरोरा द्वारा नगर पालिका कार्यालय और संबंधित बैंकों में शुरू की गई ताबड़तोड़ पूछताछ से प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है।
सिंडिकेट – सांठगांठ…
बताया जा रहा है कि पिछले 5 से 6 वर्षों से मवेशी बाजार से हर हफ्ते करीब 90 हजार से 1 लाख रुपये से अधिक की पंजीयन शुल्क वसूली की जा रही थी, लेकिन नगर पालिका के मुख्य खाते में नाममात्र की रकम ही जमा कराई जाती थी। इस काली कमाई का बंदरबांट एक संगठित सिंडिकेट के जरिए किया जा रहा था।
चेहरों पर दिखी शिकन…
जांच का दायरा बढ़ते देख नगर पालिका के कई मौजूदा व पूर्व जन प्रतिनिधियों समेत घोटाले से जुड़े संदिग्ध अधिकारियों और कर्मचारियों की नींद उड़ गई है। नगर पालिका और बैंक से लेन-देन के रिकॉर्ड खंगाले जाने के बाद से ही दोषी सफेदपोश नेताओं के चेहरों पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा रही हैं। सूत्र बताते हैं कि जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, इस पूरे फर्जीवाड़े में शामिल कई बड़े नामों का बेनकाब होना तय माना जा रहा है।
जल्द ही इस मामले में बड़ा खुलासा किया जायेगा….

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