डिजिटल अरेस्ट ठगी का बड़ा खुलासा, 37 लाख की साइबर ठगी में 5 आरोपी गिरफ्तार रायगढ़ पुलिस की बड़ी कार्रवाई, अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश; बैंक कर्मचारी और वेब डेवलपर सहित महिला आरोपी शामिल
रायगढ़ । डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों को डराकर ठगी करने वाले अंतर्राज्यीय साइबर गिरोह का रायगढ़ पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। करीब 36.97 लाख रुपये की ठगी के मामले में महिला समेत पांच आरोपियों को राजस्थान के भीलवाड़ा से गिरफ्तार कर ट्रांजिट रिमांड पर रायगढ़ लाया गया है। जांच में सामने आया है कि गिरोह देशभर में सक्रिय था और अब तक लगभग 1.40 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी कर चुका है।

पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देशन में साइबर थाना रायगढ़ ने इस पूरे मामले की गहन जांच की। मामला फरवरी 2026 का है, जब विद्युत विभाग के सेवानिवृत्त पर्यवेक्षक नरेंद्र ठाकुर से ठगों ने खुद को टेलीकॉम, पुलिस और सीबीआई अधिकारी बताकर डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाया और अलग-अलग बैंक खातों में 36,97,117 रुपये ट्रांसफर करा लिए।
पीड़ित को पहले एक महिला ने कॉल कर खुद को टेलीकॉम नियामक संस्था से जुड़ा बताया और उसके नाम पर फर्जी सिम के दुरुपयोग की बात कही। इसके बाद कॉल को कथित पुलिस और जांच एजेंसियों से जोड़ते हुए मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने और गिरफ्तारी की धमकी दी गई। वीडियो कॉल पर खुद को आईपीएस अधिकारी बताने वाले आरोपी ने पीड़ित को पूरी तरह भयभीत कर दिया। दबाव में आकर पीड़ित ने 30 जनवरी से 11 फरवरी के बीच पूरी राशि विभिन्न खातों में जमा कर दी।
शिकायत मिलने के बाद साइबर पुलिस ने तकनीकी जांच, बैंक ट्रेल और साइबर इंटेलिजेंस के आधार पर आरोपियों की पहचान की। जांच में सामने आया कि ठगी की राशि का हिस्सा राजस्थान के भीलवाड़ा स्थित बैंक खातों में जमा हुआ है। इसके बाद विशेष टीम गठित कर वहां दबिश दी गई और मुख्य आरोपी राहुल व्यास, जो बंधन बैंक में कर्मचारी है, को हिरासत में लिया गया। उससे पूछताछ में पूरे गिरोह का खुलासा हुआ।
पुलिस ने क्रमशः रविराज सिंह, आरती राजपूत, संजय मीणा और गौरव व्यास को भी अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार किया। आरोपियों के कब्जे से 7 मोबाइल फोन और एक लैपटॉप जब्त किया गया है। जांच में इनके बैंक खातों में भारी लेन-देन के प्रमाण मिले हैं, जिसमें गौरव व्यास के खाते में ही लगभग 60 लाख रुपये के संदिग्ध ट्रांजेक्शन सामने आए हैं। सभी आरोपियों के बैंक खाते सीज कर दिए गए हैं।
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे संगठित तरीके से काम करते थे और ठगी की रकम का प्रतिशत के आधार पर आपस में बंटवारा करते थे। गिरोह के सदस्य इंटरनेट और ऑनलाइन माध्यम से साइबर ठगी के तरीके सीखकर लोगों को निशाना बनाते थे। आरोपियों ने रायगढ़ के पीड़ित से ठगी में अपने खातों के उपयोग की बात स्वीकार की है।
इस कार्रवाई में साइबर थाना प्रभारी विजय चेलक, सहायक उप निरीक्षक ज्योत्सना शर्मा, प्रधान आरक्षक करूणेश राय सहित साइबर टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने लोगों से अपील करते हुए कहा है कि “डिजिटल अरेस्ट, फर्जी सीबीआई या पुलिस अधिकारी बनकर आने वाले कॉल से सावधान रहें। कोई भी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर पैसे ट्रांसफर करने के लिए नहीं कहती। ऐसे मामलों में घबराएं नहीं और तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी थाने में शिकायत करें।”

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