अंबिकापुर रिंग रोड बांध तालाब घोटाला: अवैध कब्जा, फर्जी दस्तावेज और नामांतरण पर उठे गंभीर सवाल

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अंबिकापुर। सरगुजा जिला के अंबिकापुर स्थित रिंग रोड बांध तालाब मामले में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। रिंग रोड बांध सहित कई तालाबों पर अवैध कब्जे और फर्जी दस्तावेजों के जरिए नामांतरण किए जाने के आरोप सामने आए हैं, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश मिश्रा ने दावा किया है कि लगभग 6.25 एकड़ क्षेत्रफल वाला तालाब सिमटकर महज 57 डिसमिल रह गया है। आरोप है कि जनवरी 2026 में शेष बची जमीन की भी रजिस्ट्री कर दी गई। बताया जा रहा है कि तालाब क्षेत्र को रातों-रात पाटकर उस पर कब्जा किया गया और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमीन का नामांतरण करा लिया गया।

मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू दो अलग-अलग मृत्यु प्रमाण पत्रों का सामने आना है। जयलाल नामक व्यक्ति के एक प्रमाण पत्र में मृत्यु तिथि 23 अप्रैल 1976 (जारी वर्ष 2018) दर्ज है, जबकि दूसरे में 12 अप्रैल 1963 (जारी वर्ष 2025) अंकित है। इस विरोधाभास ने दस्तावेजों की सत्यता और पूरी प्रक्रिया पर गंभीर संदेह खड़ा कर दिया है।

इसके अलावा पटवारी और तहसील स्तर पर भी अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। वंशवृक्ष में गड़बड़ी, बिना तारीख के आधिकारिक पत्र जारी होना और अलग-अलग मामलों में अलग-अलग वंशवृक्ष प्रस्तुत किए जाने जैसी बातें सामने आई हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता ने पूरे मामले में फर्जी नामांतरण को निरस्त करने, दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही कलेक्टर सरगुजा कार्यालय से हस्तक्षेप कर कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपील की गई है।

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