सेतगंगा–फास्टरपुर में प्रस्तावित बायोफ्यूल प्लांट को लेकर बढ़ा विवाद, जल संकट की आशंका से किसान चिंतित

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मुंगेली। जिले के सेतगंगा–फास्टरपुर परिक्षेत्र में प्रस्तावित मल्टी-इंटीग्रेटेड बायोफ्यूल प्लांट को लेकर विरोध तेज होता जा रहा है। 28 अप्रैल को क्षेत्र प्रवास पर पहुंचे किसान कांग्रेस के पदाधिकारियों ने परियोजना पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए इसे ग्रामीणों के जल अधिकारों के लिए खतरा बताया है।

किसान कांग्रेस के महासचिव प्रशासनिक आत्मासिंह क्षत्रिय ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित संयंत्र के शुरू होने से आसपास के 20 से 25 गांवों में पेयजल और सिंचाई जल की भारी कमी हो सकती है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र पहले से ही जल संकट से जूझ रहा है, जहां मार्च से जून के बीच अधिकांश बोरवेल सूख जाते हैं और ग्रामीणों को पेयजल के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ता है।

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क्षत्रिय ने बताया कि सेतगंगा–फास्टरपुर इलाके में न तो कोई स्थायी नदी स्रोत है और न ही पर्याप्त नहर व्यवस्था उपलब्ध है। ऐसे में यहां बड़े उद्योग की स्थापना का निर्णय स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप नहीं माना जा सकता। उन्होंने आशंका जताई कि प्रस्तावित प्लांट के संचालन के लिए बड़े पैमाने पर भूजल दोहन किया जाएगा, जिससे पूरे क्षेत्र का जल स्तर प्रभावित होगा।

जानकारी के अनुसार, आर.एस.एल.डी. बायोफ्यूल प्रा. लिमिटेड द्वारा कैथनवागांव नागोपहरी में 600 केएलडी क्षमता का रेक्टिफाइड स्पिरिट डिस्टिलरी, एथेनॉल प्लांट तथा 12 मेगावाट विद्युत उत्पादन इकाई स्थापित की जा रही है। इस परियोजना के लिए प्रतिदिन हजारों क्यूबिक मीटर पानी की आवश्यकता बताई जा रही है, जिससे 20-25 किलोमीटर के दायरे में भूजल स्तर पर दबाव बढ़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है।

क्षत्रिय ने कहा कि वे क्षेत्र के लघु एवं सीमांत किसानों के हितों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होने देंगे और इस मुद्दे को लेकर संबंधित अधिकारियों से तार्किक संवाद जारी रखेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि प्लांट प्रबंधन से चर्चा के दौरान स्पष्ट जवाब नहीं मिला। उनके अनुसार, कंपनी के अधिकारियों ने कहा कि वे उच्च प्रबंधन के निर्देश के बिना इस विषय पर कोई ठोस जानकारी देने में सक्षम नहीं हैं।

वहीं, प्लांट प्रबंधन की ओर से मौखिक रूप से यह जानकारी दी गई है कि यह केवल शुगर आधारित संयंत्र है, जिससे क्षेत्र के किसानों को लाभ होगा और किसी प्रकार की जल समस्या उत्पन्न नहीं होगी। हालांकि, इस आश्वासन से स्थानीय लोगों की चिंता कम होती नहीं दिख रही है।

इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता, किसान एवं स्थानीय जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। क्षेत्र में बढ़ते विरोध के बीच अब प्रशासन की भूमिका अहम मानी जा रही है कि वह पर्यावरणीय प्रभाव और जल संसाधनों के संतुलन को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय ले।

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