अमरकंटक में भीषण गर्मी की तपन से नर्मदा क्षेत्र के बांधों का जलस्तर घटा

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सावित्री सरोवर लगभग सूखा , गायत्री सरोवर में भी जलस्तर कम — कपिलधारा के प्रवाह पर दिखने लगा असर

संवाददाता — श्रवण कुमार उपाध्याय

अमरकंटक — मां नर्मदा की उद्गम स्थली / पवित्र नगरी अमरकंटक में लगातार बढ़ रही भीषण गर्मी का प्रभाव अब क्षेत्र के जल स्रोतों पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है । बीते लगभग पंद्रह दिनों से तापमान में लगातार वृद्धि , तेज धूप तथा बढ़ते वाष्पीकरण के कारण नर्मदा क्षेत्र से जुड़े छोटे-बड़े बांधों एवं जलाशयों का जलस्तर तेजी से घट रहा है । कई स्थानों पर जलस्तर में लगभग डेढ़ से दो फीट तक की गिरावट दर्ज की गई है ।
उद्गम स्थल अमरकंटक क्षेत्र में पिछले दिनों तापमान 30 से 39 डिग्री सेल्सियस के बीच बना रहा। वातावरण में नमी की कमी और लगातार पड़ रही तेज गर्मी के कारण जल भंडारण क्षमता प्रभावित हुई है। इसका असर नर्मदा उद्गम क्षेत्र के पुष्कर बांध, लक्ष्मी सरोवर, कबीर सरोवर, माधव सरोवर सहित अन्य प्राकृतिक जल स्रोतों पर भी देखने को मिल रहा है। इसके साथ ही कई स्थानों पर कुएं, तालाब, छोटे नाले एवं नलकूपों में भी जल उपलब्धता कम होने लगी है।
सबसे अधिक प्रभाव संत कबीर सरोवर स्थित नर्मदा जल बांध पर देखा गया है, जहां जलस्तर में लगभग दो फीट से अधिक की गिरावट बताई जा रही है । वहीं दूसरी ओर आरंडी संगम तट पर निर्मित माधव सरोवर नर्मदा बांध में अपेक्षाकृत कम गिरावट दर्ज की गई है जिससे यह क्षेत्र फिलहाल कुछ हद तक संतुलित स्थिति में बना हुआ है ।
क्षेत्र के प्रमुख जल स्रोतों में शामिल सोनमूड़ा मार्ग स्थित सावित्री सरोवर बांध की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है। गत वर्षों की भांति इस वर्ष भी यहां जलस्तर तेजी से घटा है और वर्तमान में यह लगभग सूखने की स्थिति में पहुंच गया है । बांध क्षेत्र अब मैदान जैसा दिखाई देने लगा है तथा शेष बचे जल में पशु स्नान करते नजर आ रहे हैं ।
इसी प्रकार माई की बगिया मार्ग स्थित गायत्री सरोवर बांध में भी जलस्तर लगातार कम हो रहा है । हालांकि यहां अभी कुछ मात्रा में जल शेष है लेकिन यदि मौसम की यही स्थिति बनी रही तो आने वाले दिनों में यह जलाशय भी गंभीर संकट का सामना कर सकता है ।
उल्लेखनीय है कि कुछ समय पूर्व क्षेत्र में हुई हल्की वर्षा और रिमझिम फुहारों के कारण तापमान नियंत्रित बना हुआ था तथा जल स्रोतों को आंशिक राहत मिली थी । आज गुरुवार को भी हल्दी बारिश हुई है जिससे मौसम में ठंडक घुल गई है लेकिन पिछले पंद्रह दिनों से लगातार पड़ रही तेज धूप और गर्म हवाओं के चलते जल स्रोतों पर दबाव तेजी से बढ़ गया है ।
जलस्तर में गिरावट का असर अमरकंटक के प्रमुख प्राकृतिक आकर्षण कपिलधारा जलप्रपात पर भी दिखाई देने लगा है । यहां जल प्रवाह पूर्व की तुलना में काफी कम महसूस किया जा रहा है जो स्थानीय लोगों , संतों तथा पर्यटकों के बीच चिंता का विषय बनता जा रहा है ।
स्थानीय नागरिकों , संतो एवं पर्यावरण प्रेमियों का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए जल संरक्षण , जल स्रोतों के संरक्षण तथा वर्षा जल संचयन जैसे उपायों को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है , ताकि आने वाले समय में जल संकट की स्थिति से बचा जा सके ।

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