डिप्टी सीएम के गृहजिले में शासकीय भूमि पर अवैध निर्माण का आरोप, जनदर्शन से लेकर पालिका तक गूंजा मामला

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करोड़ों की सरकारी जमीन पर बहुमंजिला भवन निर्माण को लेकर उठे सवाल, जांच और कार्रवाई की मांग तेज

मुंगेली। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री अरुण साव के गृहजिले मुंगेली में शासकीय भूमि पर कथित अवैध निर्माण का मामला चर्चा का विषय बन गया है। शहर के एक प्रमुख क्षेत्र में करोड़ों रुपये मूल्य की शासकीय भूमि पर बहुमंजिला भवन निर्माण किए जाने के आरोप सामने आए हैं। मामले को लेकर स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों द्वारा जांच एवं कार्रवाई की मांग की जा रही है।

जानकारी के अनुसार संबंधित भूमि पर निर्माण कार्य को लेकर वैधानिक अनुमति, नक्शा स्वीकृति और राजस्व विभाग की अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) संबंधी प्रश्न उठाए जा रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि बिना आवश्यक स्वीकृतियों के निर्माण कार्य किया गया है, जिससे शासन को राजस्व हानि होने की आशंका है।

जनदर्शन में भी पहुंचा मामला

मामले को लेकर नगर पालिका क्षेत्र के एक पार्षद द्वारा कलेक्टर जनदर्शन में लिखित शिकायत प्रस्तुत कर जांच की मांग की गई है। शिकायत में नगर क्षेत्र में संचालित कथित अवैध निर्माणों की जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग की गई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर में सड़क चौड़ीकरण और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान छोटे दुकानदारों और आम नागरिकों पर सख्ती दिखाई जा रही है, जबकि प्रभावशाली लोगों के निर्माण कार्यों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से सवाल खड़े हो रहे हैं।

नगर पालिका की भूमिका पर उठ रहे सवाल

शहर में बिना अनुमति निर्माण होने की स्थिति में सामान्यतः नोटिस जारी किए जाने की प्रक्रिया अपनाई जाती है, लेकिन इस मामले में अब तक कार्रवाई नहीं होने को लेकर नागरिकों के बीच चर्चा बनी हुई है। लोगों का कहना है कि यदि निर्माण नियमों के विरुद्ध है तो संबंधित विभागों को समय रहते हस्तक्षेप करना चाहिए था।

इधर, स्थानीय स्तर पर विभिन्न प्रकार की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं, हालांकि इनकी किसी भी स्तर पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

सीएमओ ने दिया सख्त संदेश

नगर पालिका परिषद मुंगेली के मुख्य नगर पालिका अधिकारी होरी सिंह ठाकुर ने मामले पर स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि नगर पालिका क्षेत्र में किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा, “यदि किसी व्यक्ति द्वारा बिना अनुमति, बिना नक्शा स्वीकृति अथवा शासकीय भूमि पर निर्माण किया गया है तो उसकी जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। शिकायत प्राप्त हुई है, संबंधित निर्माण स्थल का निरीक्षण कराया जाएगा। यदि जांच में अनियमितता पाई जाती है तो नोटिस जारी करने से लेकर निर्माण हटाने तक की कार्रवाई की जाएगी। नियम सभी के लिए समान हैं, चाहे वह आम नागरिक हो या प्रभावशाली व्यक्ति। किसी को भी कानून से ऊपर नहीं माना जाएगा।”

हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नगर पालिका स्तर से कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए हैं तो फिर संबंधित अधिकारियों द्वारा नोटिस और जांच की प्रक्रिया में विलंब क्यों हो रहा है, यह भी जांच का विषय है।

पालिका उपाध्यक्ष ने भी की निष्पक्ष जांच की मांग

नगर पालिका परिषद मुंगेली के उपाध्यक्ष जयप्रकाश मिश्रा ने कहा कि शहर के सुनियोजित विकास के लिए नियमों का पालन आवश्यक है।

उन्होंने कहा, “यदि शासकीय भूमि पर कब्जा कर निर्माण किए जाने की शिकायत मिली है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। नियम विरुद्ध पाए जाने वाले निर्माणों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। जनता को यह विश्वास होना चाहिए कि कानून सबके लिए बराबर है और किसी भी अवैध गतिविधि को संरक्षण नहीं दिया जाएगा।”

प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी निगाहें

शहर में अवैध निर्माण के आरोपों और जनदर्शन में की गई शिकायत के बाद अब लोगों की निगाहें जिला प्रशासन, राजस्व विभाग और नगर पालिका परिषद की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। यदि शिकायतों की निष्पक्ष जांच होती है तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित निर्माण वैधानिक है या नहीं।

शहर के प्रबुद्ध नागरिकों का मानना है कि शासन की भूमि और सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा के लिए सभी मामलों में समान और निष्पक्ष कार्रवाई आवश्यक है। इससे न केवल कानून के प्रति विश्वास मजबूत होगा, बल्कि शहर के सुनियोजित विकास को भी गति मिलेगी।

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