स्वस्थ छत्तीसगढ़ की नई रूपरेखा तैयार, मातृ-शिशु स्वास्थ्य और डिजिटल हेल्थ पर विशेष जोर
स्वस्थ छत्तीसगढ़ परामर्श में विशेषज्ञों ने सुझाए ठोस कदम; स्वास्थ्य तंत्र सुदृढ़ीकरण, मानव संसाधन और तकनीक आधारित सेवाओं को मिलेगी नई गति
रायपुर । छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी, सुलभ और जनकेंद्रित बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने नई पहल शुरू की है। इसी कड़ी में गुरुवार को स्वास्थ्य भवन, नवा रायपुर में आयोजित ‘स्वस्थ छत्तीसगढ़ परामर्श’ में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने राज्य की स्वास्थ्य चुनौतियों और संभावनाओं पर मंथन किया। बैठक में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी, दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर पहुंच, स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को प्रमुख प्राथमिकताओं के रूप में चिन्हित किया गया।
बैठक की अध्यक्षता स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव अमित कटारिया ने की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है। इसके लिए स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को और मजबूत बनाने तथा सेवाओं की गुणवत्ता में निरंतर सुधार पर काम किया जा रहा है। इस दौरान आयुक्त सह संचालक स्वास्थ्य सेवाएं संजीव कुमार झा भी उपस्थित थे।
बैठक में विशेषज्ञों ने बताया कि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में और कमी लाने के लिए गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान, नियमित जांच, सुरक्षित प्रसव और प्रभावी रेफरल व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है। विशेष रूप से दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं को समय पर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उपायों पर चर्चा की गई।
सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पतालों के पास बर्थ वेटिंग होम स्थापित करने, आपातकालीन परिवहन सेवाओं को और मजबूत करने तथा प्रसूति सेवाओं से जुड़े स्वास्थ्यकर्मियों के कौशल विकास पर भी जोर दिया गया।
बाल स्वास्थ्य से जुड़े सत्रों में नवजात मृत्यु, निमोनिया, डायरिया और कुपोषण जैसी चुनौतियों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने जन्म के तुरंत बाद स्तनपान, नवजात शिशुओं की बेहतर देखभाल और समुदाय स्तर पर स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने को महत्वपूर्ण बताया।
बैठक में यह भी बताया गया कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए आंकड़ों और तकनीक का बेहतर उपयोग किया जाना चाहिए। स्वास्थ्य योजनाओं की निगरानी, संसाधनों के प्रभावी उपयोग और जरूरत के अनुसार सेवाओं के विस्तार के लिए डेटा आधारित निर्णयों पर जोर दिया गया। दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए भर्ती, प्रशिक्षण और स्वास्थ्यकर्मियों को लंबे समय तक सेवाएं देने के लिए प्रोत्साहन संबंधी उपायों पर भी चर्चा हुई।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान की उपलब्धियों को भी साझा किया गया। बताया गया कि व्यापक स्वास्थ्य जांच, गांव-गांव तक पहुंच और तकनीक के उपयोग से बस्तर क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में सकारात्मक परिणाम मिले हैं।
डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी व्यापक चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने ई-संजीवनी, डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड, ABHA आधारित सेवाओं और ऑनलाइन रेफरल व्यवस्था के विस्तार को भविष्य की महत्वपूर्ण आवश्यकता बताया। इससे मरीजों को बेहतर और त्वरित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
परामर्श के अंत में स्वास्थ्य क्षेत्र की प्रमुख प्राथमिकताओं पर व्यापक सहमति बनी। विशेषज्ञों ने कहा कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार, स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने, मानव संसाधनों को मजबूत करने और डिजिटल तकनीकों के अधिक उपयोग से छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य क्षेत्र में नई ऊंचाइयां हासिल कर सकता है। बैठक से प्राप्त सुझावों के आधार पर राज्य के लिए एक सशक्त स्वास्थ्य रोडमैप तैयार किया जाएगा, जो बेहतर स्वास्थ्य संकेतकों और सभी नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में मार्गदर्शक बनेगा।

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