वेदांता एल्युमीनियम के 1,800 कर्मचारी 4,000 घंटे समर्पित कर लेकर आए समुदायों में बदलाव, 7 लाख से अधिक लोगों के जीवन पर प्रभाव
रिपोर्टर ✒️ रानू बैरागी
• कर्मचारियों ने साक्षरता, कौशल विकास, स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़ी पहलें चलाईं, जिससे समुदायों को सशक्त बनाने और समावेशी विकास को बढ़ावा देने में मदद मिली।
रायपुर । भारत की सबसे बड़ी एल्युमीनियम निर्माता कंपनी, वेदांता एल्युमीनियम ने आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्वयंसेवक दिवस के अवसर पर अपनी अब तक की सबसे बड़ी कर्मचारी-नेतृत्व वाली सामुदायिक पहल की घोषणा की। इस पहल के तहत 1,800 कर्मचारियों ने कुल 4,000 घंटे यानी लगभग 167 दिनों की सेवा, समुदाय को समर्पित की, जिससे ओडिशा, छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश में स्थित इसकी इकाइयों के आसपास 7 लाख से अधिक लोगों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा।
यह पहल वेदांता की ‘समुदायों का विकास’ वाली सोच को दर्शाती है, जो वेदांता एल्युमीनियम की कार्य-संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कंपनी स्वयंसेवा की भावना को बढ़ावा देकर ऐसा बदलाव ला रही है, जिसमें कर्मचारी सक्रिय रूप से समाज से जुड़ते हैं और सामाजिक प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। कर्मचारियों ने अपने कार्यस्थल से आगे बढ़कर स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका, पर्यावरण और महिलाओं के सशक्तिकरण जैसे क्षेत्रों में कई बदलाव लाने वाली गतिविधियों का नेतृत्व किया। पेड़ लगाने के अभियान और तालाबों की सफाई से लेकर साक्षरता सत्र, कौशल विकास कार्यशालाएँ, स्वास्थ्य शिविर और रक्तदान शिविर तक स्वयंसेवकों ने ऐसे कार्य किए, जो समाज पर लंबे समय तक सकारात्मक प्रभाव छोड़ेंगे।
इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर टिप्पणी करते हुए वेदांता एल्युमीनियम के सीईओ राजीव कुमार ने कहा, “वेदांता एल्युमीनियम में हम मानते हैं कि हमारी ज़िम्मेदारी हमारे संचालन से कहीं आगे तक जाती है। यह उन समुदायों में सकारात्मक और लंबे समय तक रहने वाला बदलाव लाने के बारे में है, जो हमारी वृद्धि को संभव बनाते हैं। इस वर्ष हमने जितने बड़े पैमाने पर कर्मचारियों और सहयोगियों की भागीदारी देखी है, वह उनके भीतर मौजूद गहरे उद्देश्य और प्रतिबद्धता को दिखाता है। लगभग 4,000 घंटे की सामुदायिक सेवा देना केवल सहभागिता का माप नहीं है, बल्कि समग्र विकास के प्रति हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रमाण भी है।”
कंपनी के प्रयासों ने राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की हैं। ओडिशा के लांजीगढ़ में जमीनी स्तर पर शुरू की गई खेल पहल ने युवा तीरंदाजों को तैयार किया है, जो अब राष्ट्रीय चैंपियनशिप में हिस्सा लेते हैं। वहीं, पारंपरिक सौरा और ढोकरा कला को फिर से जीवंत किया गया है, जिससे स्थानीय कारीगर नए बाजारों तक पहुँच पा रहे हैं और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ के कोरबा में, आजीविका कार्यक्रमों के माध्यम से प्रशिक्षित महिलाएँ अब प्रतिष्ठित प्रदर्शनियों में अपने उत्पाद प्रदर्शित कर रही हैं, जिससे स्थानीय कौशल छोटे व्यवसायों में बदल रहे हैं। ओडिशा और छत्तीसगढ़ में आयोजित बड़े स्वास्थ्य शिविरों ने स्थानीय स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत बनाया है, जहाँ हज़ारों लोगों को रोकथाम संबंधी स्वास्थ्य सेवाएँ और जागरूकता मिली है, जिससे वंचित समुदायों में बीमारियों का बोझ काफी कम हुआ है। आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में स्कूलों में डिजिटल लर्निंग और लैब्स स्थापित किए गए हैं, जो युवाओं को आधुनिक समय के लिए ज़रूरी कौशल प्रदान कर रहे हैं। इन सभी पहलों ने मिलकर कंपनी के संचालन वाले क्षेत्रों में समग्र विकास को आगे बढ़ाया है।
इन निरंतर प्रयासों के माध्यम से वेदांता एल्युमीनियम समुदायों के साथ अपने जुड़ाव को और मजबूत कर रहा है। जो शुरुआत में कुछ व्यक्तियों द्वारा की गई सेवा थी, वह अब पूरे वर्ष चलने वाले एक ऐसे आंदोलन में बदल गई है, जहाँ सभी मिलकर जिम्मेदारी साझा करते हैं और स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका, पर्यावरण और महिलाओं के सशक्तिकरण में वास्तविक बदलाव ला रहे हैं। स्वयंसेवा को अपनी संस्कृति का हिस्सा बनाकर कंपनी एक ऐसा सकारात्मक प्रभाव पैदा कर रही है, जिससे स्थानीय प्रणालियाँ मजबूत हो रही हैं और समावेशी विकास को बढ़ावा मिल रहा है। इससे यह सुनिश्चित हो रहा है कि विकास की रोशनी उन सभी क्षेत्रों तक पहुँचे, जहाँ कंपनी काम करती है

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