वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल लिक्टेनस्टीन की यात्रा पर। यहां भारत-ईएफटीए टीईपीए सहयोग के कार्यान्वयन और निवेश प्रोत्साहन की उन्होंने समीक्षा की

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वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 7 जनवरी 2026 को लिक्टेनस्टीन की आधिकारिक यात्रा की। यात्रा के दौरान, श्री गोयल ने वाडुज कैसल में युवराज वॉन उंड जु लिक्टेनस्टीन से एक सौजन्य भेंट की।   प्रधानमंत्री सुश्री ब्रिगिटे हास से भेंट की और  उप-प्रधानमंत्री सुश्री सबाइन मोनाउनी,  एवं विदेश मामलों, पर्यावरण और संस्कृति मंत्री के साथ बैठक की। ओआरएफ के साथ उन्होंने साक्षात्कार में भाग लिया और उप-प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित भोज में शरीक हुए। हिल्टी एजी का दौरा किया और वहां के उच्च नेतृत्व के साथ बातचीत की।

वाणिज्य मंत्री की 2026 की यह पहली मंत्रिस्तरीय यात्रा भारत-ईएफटीए व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते (टीईपीए) के कार्यान्वयन को तेज करने और इसे निरंतर व्यापार, निवेश तथा विनिर्माण साझेदारियों में बदलने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की रचनात्मक भूमिका और उनके आशावाद पर जोर को भी याद किया। प्रधानमंत्री मोदी की इस बात को दोहराया गया : “अनिश्चितता के बीच विश्व भारत को आशा की किरण के रूप में देख रहा है।” मंत्री ने नोट किया कि यह भावना भारत के इन साझेदारियों के प्रति उस दृष्टिकोण को गुंजायमान करता  है जो व्यवसायों, एमएसएमई, किसानों, मछुआरों और विभिन्न समुदायों के लिए वास्तविक परिणाम पैदा करना चाहते  हैं।

टीईपीए भारत के विकसित ईएफटीए देशों (आइसलैंड, लिक्टेनस्टीन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड) के समूह के साथ पहला मुक्त व्यापार समझौता है। यह भारतीय उत्पादों की बेहतर गुणवत्ता, भारतीय निर्यात के विस्तारित और विविधीकृत रेंज तथा “मेक इन इंडिया” और “मेक फॉर द वर्ल्ड” को समर्थन देने वाली भारत की विनिर्माण क्षमताओं के निरंतर सशक्तिकरण का संकेत देता है।मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि टीईपीए उच्च गुणवत्ता वाले आर्थिक संबंधों की ओर एक बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है। भारत का विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र वैश्विक बाजारों के पैमाने गढ़ने से लेकर, प्रतिस्पर्धात्मकता और विश्वसनीयता को तेजी से संयोजित कर रहा है।

लिक्टेनस्टीन नेतृत्व और व्यापार समुदाय के साथ अपनी बैठकों में, मंत्री ने भारत की विकास गाथा को दीर्घकालिक साझेदारी के लिए स्थिर और परिमाणात्मक  आधार के रूप में प्रस्तुत किया। भारत आज दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, जिसका 2025 में अनुमानित जीडीपी 4.13 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर है। भारत पैमाने और सुधार गति दोनों प्रदान करता है जिसका अपना एक बड़ा और विस्तारित उपभोक्ता बाजार, गहन औद्योगिक आधार, तथा व्यापार करने की सुगमता है तथा, डिजिटलीकरण तथा बुनियादी ढांचा-आधारित प्रतिस्पर्धात्मकता पर जहां निरंतर ध्यान दिया जा रहा है।

इस दौरान दोनों पक्षों ने वैश्विक व्यापारिक वातावरण पर भी अपने विचारों का आदान-प्रदान किया। अभी दुनिया भर में आपूर्ति श्रृंखलाओं को विभिन्न व्यवधानों, अनिश्चितताओं तथा घोर अस्थिरता का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में भारत और लिक्टेनस्टीन निवेशकों और उद्यमों को स्थिरता तथा अनुमानितता प्रदान करने के लिए अपनी परस्पर ताकतों को जोड़ सकते हैं। भारत का पैमाना, प्रतिभा तथा विनिर्माण गहराई लिक्टेनस्टीन की विशेषीकृत औद्योगिक क्षमताओं, उच्च-मूल्य नवाचार तथा वित्तीय विशेषज्ञता को पूरक बना सकती है। दोनों एक साथ मिलकर  लचीली मूल्य श्रृंखलाएं बना सकते हैं तथा एक विश्वसनीय निवेश पुल का निर्माण कर सकते हैं, जो अभी अस्थिर हो रहे विश्व में विश्वास और आशा का संकेत भेजेगा।हिल्टी एजी में, मंत्री ने उद्योग-से-उद्योग की साझेदारियों को मजबूत करने, उच्च मूल्य संवर्धन, एमएसएमई सहित आपूर्तिकर्ता संपर्कों तथा वैश्विक संचालन में भारत-आधारित उत्पादन की विस्तारित भूमिका के लिए अपनी वार्ता के जरिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने लिक्टेनस्टीन कंपनियों और टीईपीए को भारत में अपनी उपस्थिति बढ़ाने, विनिर्माण तथा नवाचार साझेदारियां बनाने तथा विभिन्न क्षेत्रों में भारत के विस्तारित अवसरों में भाग लेने के लिए एक मंच के रूप में उपयोग करने के लिए आमंत्रित किया।

यात्रा का समापन भारत-लिक्टेनस्टीन तथा व्यापक भारत-ईएफटीए सहयोग को आने वाले महीनों में तेज करने के आह्वान के साथ हुआ। मंत्री ने ईएफटीए कंपनियों को भारत के प्रमुख व्यापार एवं निवेश आयोजनों में अधिक भागीदारी के लिए जोर दिया  तथा व्यापार संवादों और प्रतिनिधिमंडलों के माध्यम से निकट सहयोग के लिए आमंत्रित किया। टीईपीए द्वारा भारत में 100 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश को सुगम बनाने तथा 10 लाख प्रत्यक्ष नौकरियों के सृजन की एक महत्वाकांक्षी योजना बनाई गई है। टीईपीए के तहत ईएफटीए का जो बाजार पहुंच प्रस्ताव है उसमे गैर-कृषि उत्पादों का 100% तथा प्रसंस्कृत कृषि उत्पादों (पीएपी) पर टैरिफ छूट को कवर करना शामिल है। फार्मा, चिकित्सा उपकरण एवं प्रसंस्कृत खाद्य आदि क्षेत्रों को पीएलआई से संबंधित संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए विभिन्न प्रस्ताव दिए गए हैं। ईएफटीए को भारत द्वारा दिया प्रस्ताव 82.7% टैरिफ लाइनों को कवर करता है, जो ईएफटीए निर्यात के 95.3% के बराबर है। इन आयातों का 80% से अधिक सोना है, जिसमें सोने पर प्रभावी शुल्क में कोई बदलाव नहीं है। संवेदनशील क्षेत्रों की रक्षा की गई है, जिनमें फार्मा, चिकित्सा उपकरण, प्रसंस्कृत खाद्य, डेयरी, सोया, कोयला तथा संवेदनशील कृषि उत्पाद शामिल हैं। भारत अपने यहां लिक्टेनस्टीन और ईएफटीए के उद्यमियों का ज्यादा से ज्यादा स्वागत करने को तैयार है जिसका उद्देश्य टीईपीए को एक  मजबूत निवेश केंद्र बनाने तथा गहन प्रौद्योगिकी साझेदारियों तथा वैश्विक व्यापार एवं निवेश प्रवाहों में अपनी एक बड़ी छाप छोड़ना है।

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