पीयूष गोयल ने किया ‘गिफ्टमिल्क योजना’ के तीसरे चरण का शुभारंभ, खनन क्षेत्रों के बच्चों को मिलेगा पोषण का संबल


रायपुर/नई दिल्ली । छत्तीसगढ़ के दूरस्थ एवं खनन प्रभावित अंचलों में बाल कुपोषण के खिलाफ लड़ाई को और मजबूत करते हुए सेल–भिलाई इस्पात संयंत्र की महत्वाकांक्षी सीएसआर पहल ‘गिफ्टमिल्क योजना’ के तृतीय चरण का शुभारंभ किया गया। 6 जनवरी 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी कॉन्क्लेव के दौरान केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस विस्तार योजना का औपचारिक ऐलान किया।
इस राष्ट्रीय स्तर के कॉन्क्लेव का आयोजन राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड – फाउंडेशन फॉर न्यूट्रिशन (एनएफएन) द्वारा किया गया, जिसका मुख्य विषय “पोषण सुरक्षा एवं कुपोषण उन्मूलन में कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व की भूमिका” रहा। इसी मंच से गिफ्टमिल्क कार्यक्रम के तीसरे चरण की शुरुआत को पोषण सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा और ठोस कदम बताया गया।


4 हजार और बच्चों को मिलेगा विटामिन युक्त दूध
योजना के तृतीय चरण के अंतर्गत भिलाई इस्पात संयंत्र की लौह अयस्क खदानों के बफर जोन में स्थित शासकीय स्कूलों के लगभग 4,000 अतिरिक्त बच्चों को विटामिन-ए और डी से युक्त फ्लेवर्ड दूध उपलब्ध कराया जाएगा। यह दूध एनडीडीबी द्वारा प्रबंधित छत्तीसगढ़ दुग्ध महासंघ के माध्यम से वितरित किया जाएगा, जिससे स्थानीय दुग्ध सहकारी संस्थाओं को भी मजबूती मिलेगी।

मंच पर बच्चों संग भावुक क्षण
शुभारंभ समारोह के दौरान एक भावनात्मक और प्रेरक दृश्य तब देखने को मिला, जब रावघाट खदान क्षेत्र से आए 21 स्कूली बच्चों को मंच पर आमंत्रित कर केंद्रीय मंत्रियों ने स्वयं उनके हाथों में ‘गिफ्टमिल्क’ के पैकेट सौंपे। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह), अन्नपूर्णा देवी, कृष्ण पाल गुर्जर, भारत सरकार के वरिष्ठ सचिवगण एवं एनडीडीबी के अध्यक्ष मीनेश शाह विशेष रूप से मौजूद रहे। सेल की ओर से निदेशक (वित्त) अशोक कुमार पंडा और कार्यपालक निदेशक राजीव पांडेय ने कार्यक्रम में सहभागिता की।
हजारों बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा को संबल
गिफ्टमिल्क कार्यक्रम का उद्देश्य खनन क्षेत्रों में अध्ययनरत बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार लाना, स्कूल में उनकी उपस्थिति बढ़ाना और सीखने की क्षमता को सुदृढ़ करना है। वर्तमान में यह योजना 102 शासकीय विद्यालयों में संचालित हो रही है, जिससे नारायणपुर, कांकेर, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी एवं बालोद जिलों के करीब 3,250 बच्चे लाभान्वित हो रहे हैं। तीसरे चरण के जुड़ने से लाभार्थी बच्चों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
कॉर्पोरेट जिम्मेदारी से सामाजिक बदलाव
उल्लेखनीय है कि इस कार्यक्रम की आधारशिला 18 अप्रैल 2023 को रखी गई थी तथा जून 2024 में सेल–बीएसपी और एनएफएन के बीच औपचारिक समझौता हुआ। इसके तहत प्रत्येक बच्चे को प्रतिदिन 200 मिलीलीटर पाश्चुरीकृत, पौष्टिक दूध प्रदान किया जाता है।
भिलाई इस्पात संयंत्र की यह पहल केवल एक सीएसआर गतिविधि नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के सुदूर अंचलों में रहने वाले बच्चों के स्वस्थ, सशक्त और उज्ज्वल भविष्य की दिशा में उठाया गया एक मजबूत और दूरदर्शी कदम मानी जा रही है।

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