स्टील के साथ भविष्य भी गढ़ रहा भिलाई इस्पात संयंत्र, अटल टिंकरिंग लैब से तैयार हो रहे कल के वैज्ञानिक

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भिलाई । भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) आज न केवल देश की औद्योगिक रीढ़ के रूप में लोहा गला रहा है, बल्कि सेक्टर-10 स्थित अपने सीनियर सेकेंडरी स्कूल के माध्यम से भविष्य के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की पौध भी तैयार कर रहा है। संयंत्र द्वारा संचालित ‘अटल टिंकरिंग लैब’ आज नई पीढ़ी के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तकनीकी दक्षता विकसित करने का एक सशक्त केंद्र बन चुकी है। नीति आयोग के ‘अटल इनोवेशन मिशन’ के तहत स्थापित यह सेल की पहली ऐसी लैब है, जहाँ छात्र किताबी ज्ञान से इतर ‘हैंड्स-ऑन लर्निंग’ के जरिए अपनी कल्पनाओं को धरातल पर उतार रहे हैं।

पूरी तरह वातानुकूलित इस लैब में 3-डी प्रिंटर, रोबोटिक्स किट, आर्डुइनो यूएनओ, रास्पबेरी-पाई और अत्याधुनिक सेंसर जैसे विश्व स्तरीय संसाधन उपलब्ध हैं। यहाँ एक समय में 40 से अधिक विद्यार्थी एक साथ बैठकर STEM (विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित) आधारित जटिल समस्याओं के समाधान खोजते हैं। लैब के इंचार्ज श्री टी. के. साहू के मार्गदर्शन में छात्र न केवल इलेक्ट्रॉनिक्स और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) सीख रहे हैं, बल्कि अपना खुद का यूट्यूब चैनल भी संचालित कर रहे हैं, जहाँ वे अपने नवाचारों को दुनिया के सामने प्रदर्शित करते हैं।

इस लैब की सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण तब मिला जब यहाँ के कक्षा 11वीं के छात्र आलौकिक चौधरी, अभिजय चौधरी और आमीन खान ने प्रतिष्ठित राष्ट्रीय प्रतियोगिता ‘मेक इन सिलिकॉन’ में आईआईटी के छात्रों को पीछे छोड़ते हुए द्वितीय स्थान प्राप्त किया। हेल्थ-केयर सेक्टर में उनके द्वारा किए गए नवाचार ने देश भर के विशेषज्ञों का ध्यान खींचा है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि भिलाई इस्पात संयंत्र विद्यार्थियों को केवल परीक्षा पास करने के लिए नहीं, बल्कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ के निर्माण के लिए तैयार कर रहा है।

बीएसपी की यह पहल केवल अपने स्कूल के छात्रों तक सीमित नहीं है। छुट्टियों के दौरान आयोजित होने वाली विशेष कार्यशालाओं में किसी भी विद्यालय के छात्र शामिल होकर भविष्य की तकनीक सीख सकते हैं। शनिवार और सरकारी छुट्टियों के दिन भी यह लैब छात्रों के प्रयोगों के लिए खुली रहती है, जो इसे एक जीवंत शिक्षण केंद्र बनाता है।

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