मदकू द्वीप बना भ्रष्टाचारियों का चारागाह 70 लाख की बाउंड्रीवाल निर्माण पर उठे गंभीर सवाल
मदकू द्वीप (मुंगेली) । मुंगेली जिले का प्रसिद्ध धार्मिक एवं पर्यटन स्थल मदकू द्वीप, जिसे हरिहर क्षेत्र के नाम से भी जाना जाता है, इन दिनों विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर चर्चा में है। शासन द्वारा स्वीकृत लाखों रुपये की राशि से कराए जा रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
शासन की स्वीकृति, निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल
जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा मदकू द्वीप के विकास के लिए बड़ी धनराशि स्वीकृत की गई है। इसी कड़ी में वन विभाग छत्तीसगढ़ द्वारा लगभग 70 लाख रुपये की लागत से मंदिर परिसर में बाउंड्रीवाल का निर्माण कराया जा रहा है।
हालांकि स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं हो रहा, जिससे भविष्य में गंभीर खतरे उत्पन्न हो सकते हैं।
तकनीकी मानकों की अनदेखी का आरोप
स्थल निरीक्षण के आधार पर लगाए जा रहे आरोपों के अनुसार—
कॉलम में 12 मिमी के स्थान पर 8 मिमी तथा रिंग के लिए 8 मिमी के स्थान पर 5 मिमी सरिया का उपयोग किया जा रहा है।
नियमानुसार 4×4 फीट गहराई तक खुदाई कर मजबूत नींव बनाई जानी चाहिए, लेकिन मौके पर केवल 1 से 1.5 फीट गहराई में ही कॉलम डाले जा रहे हैं।
तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी कम गहराई में डाले गए कॉलम दीवार का भार वहन करने में सक्षम नहीं होंगे। भविष्य में दीवार के झुकने या गिरने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। यदि ऐसा होता है, तो यह न केवल सरकारी धन की बर्बादी होगी बल्कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है।
अधिकारियों के विरोधाभासी बयान
जनपद पंचायत पथरिया के सभापति मनीष साहू ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य को लेकर वन विभाग के अधिकारियों के बयान आपस में मेल नहीं खाते—
डीएफओ का कहना है कि कार्य विभागीय स्तर पर कराया जा रहा है।
संबंधित रेंजर ने इसे ठेके पर कराया जाना बताया।
वहीं फील्ड में कार्यरत व्यक्ति ने किसी ‘विश्वकर्मा’ द्वारा निर्माण कराए जाने की बात कही।
इन विरोधाभासी बयानों ने पूरे मामले को और अधिक संदिग्ध बना दिया है। जबकि निर्माण कार्य रेंजर और गार्ड की निगरानी में चल रहा है, इसके बावजूद गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवाल विभागीय जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न लगा रहे हैं।
स्थानीय मजदूरों की अनदेखी का आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में मदकू ग्राम पंचायत क्षेत्र के मजदूरों को प्राथमिकता नहीं दी जा रही। इसके बजाय परसवानी और अकोली (जिला बलौदाबाजार) से मजदूर बुलाकर काम कराया जा रहा है, जिससे स्थानीय रोजगार के अवसर प्रभावित हो रहे हैं।
उच्च स्तर पर शिकायत
सभापति मनीष साहू ने कलेक्टर, उपमुख्यमंत्री एवं वन मंत्री को व्हाट्सएप के माध्यम से शिकायत भेजते हुए मांग की है कि—
निर्माण कार्य को तत्काल रोका जाए,
स्वतंत्र एजेंसी से इंजीनियर की देखरेख में गुणवत्ता परीक्षण कराया जाए,
दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर कठोर कार्रवाई की जाए।
न्यायालय में विचाराधीन मामला
उल्लेखनीय है कि मदकू द्वीप के विकास और मूलभूत सुविधाओं को लेकर एक याचिका उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। जिला प्रशासन और वन विभाग द्वारा न्यायालय को विकास कार्यों की प्रगति से अवगत कराया जा रहा है। ऐसे में निर्माण कार्यों में कथित लापरवाही विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी निगाहें
अब क्षेत्रवासियों और श्रद्धालुओं की निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। क्या स्वतंत्र जांच से सच्चाई सामने आएगी? क्या गुणवत्ता परीक्षण होगा और दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी?
मदकू द्वीप आस्था, पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे स्थल पर विकास कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है, ताकि जनविश्वास और श्रद्धालुओं की सुरक्षा दोनों कायम रह सकें।

The News Related To The News Engaged In The www.apnachhattisgarh.com Web Portal Is Related To The News Correspondents The Editor Does Not Necessarily Agree With These Reports The Correspondent Himself Will Be Responsible For The News.




