रामकथा के तीसरे दिन शिव विवाह एवं शिव बारात का दिव्य प्रसंग, पूज्य रविनंदन महाराज ने किया भावपूर्ण वर्णन

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रिपोर्टर ✒️ रूपचंद रॉय

बिलासपुर। सुंदरकांड सेवा समिति द्वारा गजमोहनी परिसर, मंगला, बिलासपुर में आयोजित रामकथा के तीसरे दिन रविवार को पूज्य (हरिद्वार) ने भगवान शिव एवं माता पार्वती के विवाह तथा शिव बारात का अत्यंत भावनात्मक और प्रेरणादायक कथन किया। कथा प्रतिदिन शाम 3 बजे से 7 बजे तक श्रद्धालुओं की उपस्थिति में आयोजित की जा रही है।

पूज्य महाराज ने कथा में बताया कि सती के आत्मदाह के पश्चात माता पार्वती ने पर्वतराज हिमालय के घर जन्म लिया और भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की। अन्न-जल त्यागकर वर्षों तक किए गए उनके तप की गूंज देवलोक तक पहुंची। महाराज ने शिव द्वारा पार्वती की परीक्षा का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि किस प्रकार सप्तऋषियों और स्वयं ब्राह्मण रूप में आकर शिव ने पार्वती की निष्ठा की परीक्षा ली, जिसमें वे अडिग रहीं। उनकी दृढ़ भक्ति से प्रसन्न होकर शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया।

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कथा में शिव बारात का अनोखा वर्णन भी किया गया, जिसमें देवताओं के साथ भूत-प्रेत, यक्ष, गंधर्व और नंदी की सहभागिता रही। शिव के भस्मधारी स्वरूप को देखकर माता मैना के मूर्छित होने तथा बाद में चंद्रशेखर स्वरूप धारण कर शिव के अत्यंत सुंदर रूप में प्रकट होने का प्रसंग श्रद्धालुओं को भावविभोर कर गया। अंत में वेद मंत्रों के बीच हिमालय नगरी में शिव-पार्वती विवाह संपन्न हुआ, जिसे प्रकृति और पुरुष के मिलन का प्रतीक बताया गया।

आयोजकों ने बताया कि सोमवार, चौथे दिन भगवान राम जन्मोत्सव के प्रसंग पर विशेष कथा होगी। श्रद्धालुओं से बड़ी संख्या में उपस्थित होने का आग्रह किया गया है।

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