मेडिको-लीगल प्रक्रियाओं पर विशेष सेमिनार, चिकित्सा और विधि के समन्वय पर जोर

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कोटा । एवं के संयुक्त तत्वावधान में रविवार 22 फरवरी को “मेडिको लीगल एड इन एक्शन: फ्रॉम क्लिनिक टू कोर्ट रूम” विषय पर एक दिवसीय विशेष सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार का उद्देश्य चिकित्सा एवं विधि क्षेत्र के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना तथा चिकित्सकीय मामलों से जुड़ी कानूनी प्रक्रियाओं की व्यावहारिक समझ विकसित करना रहा।

मुख्य अतिथि ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में डॉक्टर, वकील और पुलिस एक-दूसरे की पूरक कड़ियां हैं। तथ्यों का समयबद्ध और सटीक प्रस्तुतिकरण अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि देरी से न्याय प्रभावित हो सकता है। सेवानिवृत्त न्यायाधीश ने आयोजन को समाज के लिए उपयोगी बताते हुए अपने न्यायिक अनुभव साझा किए।

विश्वविद्यालय के कुलपति ने कहा कि कानून और चिकित्सा में निरंतर बदलाव होते रहते हैं, ऐसे में अद्यतन ज्ञान आवश्यक है। आईजी ने आपसी समन्वय को त्वरित न्याय का आधार बताया। अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कहा कि स्पष्ट प्रक्रिया से चिकित्सा से जुड़े कानूनी तनाव कम किए जा सकते हैं।

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KIMS की सीएमडी ने उपचार के साथ बेहतर डॉक्यूमेंटेशन और कम्युनिकेशन पर बल दिया। मेडिकल डायरेक्टर ने कहा कि सही कानूनी प्रक्रिया अपनाकर वर्षों की परेशानी से बचा जा सकता है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. शालिनी पांडे ने किया तथा आभार प्रदर्शन डॉ. ज्योति पांडे ने किया।

सेमिनार में चिकित्सकों, अधिवक्ताओं, प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। आयोजकों ने इसे चिकित्सा और विधि क्षेत्र में बेहतर तालमेल की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।

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