सीएसएमसीएल ओवरटाइम भुगतान घोटाला 100 करोड़ से अधिक के अधिसमय भत्ता मामले में अनवर ढेबर गिरफ्तार एजेंसियों के जरिए कमीशनखोरी, ईओडब्ल्यू-एसीबी की बड़ी कार्रवाई
रायपुर। छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (सीएसएमसीएल) में ओवरटाइम/अधिसमय भत्ता भुगतान के नाम पर हुए बहुचर्चित घोटाले में राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण एवं एंटी करप्शन ब्यूरो (ईओडब्ल्यू-एसीबी), रायपुर को बड़ी सफलता मिली है। ब्यूरो ने पंजीबद्ध अपराध क्रमांक 44/2024 के तहत आरोपी अनवर ढेबर को 23 फरवरी 2026 को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7बी, 8 तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी के तहत कार्रवाई की गई है।
ईडी की कार्रवाई से खुला मामला
प्रकरण की शुरुआत 29 नवंबर 2023 को हुई थी, जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) रायपुर की टीम ने तीन व्यक्तियों से 28.80 लाख रुपये नकद जब्त किए थे। इस कार्रवाई की सूचना छत्तीसगढ़ शासन को भेजी गई, जिसके आधार पर ईओडब्ल्यू-एसीबी ने मामला दर्ज कर विस्तृत विवेचना शुरू की।
ओवरटाइम के नाम पर एजेंसियों से खेल
जांच में सामने आया कि सीएसएमसीएल में मैनपावर/प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से ओवरटाइम और अधिसमय भत्ता के नाम पर सुनियोजित षड्यंत्र के तहत भारी भुगतान कराया गया। एजेंसियों द्वारा प्रस्तुत बिलों में अधिसमय भत्ते की राशि दर्शाकर भुगतान लिया जाता था, जिसे आगे शराब दुकानों में कार्यरत कर्मचारियों को दिया जाना था।
100 करोड़ से अधिक की संदिग्ध अदायगी
विवेचना के अनुसार वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच ओवरटाइम/अधिसमय भत्ता के नाम पर 100 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया। नियमानुसार यह राशि कर्मचारियों को मिलनी थी, लेकिन वास्तविकता में एजेंसियों के जरिए यह रकम कर्मचारियों तक न पहुंचकर अवैध कमीशन के रूप में निकाली और बांटी जाती रही। इससे शासन के आबकारी राजस्व को सीधे तौर पर भारी आर्थिक नुकसान हुआ।
कमीशन की रकम अनवर ढेबर तक पहुंची
ईओडब्ल्यू-एसीबी की जांच में यह भी स्थापित हुआ है कि एजेंसियों के माध्यम से निकाली गई कमीशन राशि अंततः आरोपी अनवर ढेबर तक पहुंचाई जाती थी। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद ब्यूरो ने उसे गिरफ्तार कर विशेष न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे पुलिस रिमांड पर लिया गया है।
जांच जारी, और खुलासों के संकेत
ईओडब्ल्यू-एसीबी के अनुसार प्रकरण की आगे की विवेचना जारी है और आने वाले दिनों में इस बड़े घोटाले से जुड़े और भी अहम खुलासे होने की संभावना है। यह मामला प्रदेश में आबकारी और निगम स्तर पर हुए सबसे बड़े वित्तीय अनियमितताओं में से एक माना जा रहा है।

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