तीसरे बजट में भी संविदा–मनरेगा कर्मियों को झटका, निराश दिखे कर्मचारी
रायपुर । छत्तीसगढ़ सरकार के तीसरे बजट से भी संविदा एवं मनरेगा कर्मचारियों को कोई राहत नहीं मिली। मंगलवार को विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट वित्त मंत्री द्वारा प्रस्तुत किया गया, लेकिन इसमें वर्षों से सेवा दे रहे मनरेगा एवं अन्य संविदा कर्मचारियों की नियमितीकरण, वेतन वृद्धि और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी मांगों पर कोई घोषणा नहीं होने से प्रदेशभर में कर्मचारियों में भारी निराशा देखी जा रही है।
मनरेगा कर्मियों का कहना है कि लगभग 20 वर्षों से सेवा देने के बावजूद उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए अब तक कोई ठोस मानव संसाधन नीति लागू नहीं की गई है। चुनाव से पूर्व जारी वीडियो में नियमितीकरण का भरोसा दिलाया गया था, लेकिन बजट में इसका कोई उल्लेख न होने से “सुशासन” पर विश्वास डगमगाने लगा है।
तीन साल से वेतन वृद्धि नहीं
मनरेगा महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि वर्ष 2023 के बाद से लगातार तीन वर्षों से वेतन वृद्धि नहीं हुई है। अल्प मानदेय पर मनरेगा के साथ-साथ प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन, एसआईआर और पंचायत स्तर के अन्य शासकीय कार्य इन्हीं कर्मचारियों से कराए जा रहे हैं, लेकिन बदले में न तो सेवा सुरक्षा है और न ही सामाजिक सुरक्षा।
उन्होंने यह भी कहा कि मध्यप्रदेश, राजस्थान और बिहार जैसे भाजपा शासित राज्यों में मनरेगा कर्मियों के लिए बेहतर मानव संसाधन नीति, सामाजिक सुरक्षा और वेतन व्यवस्था लागू है, जबकि “डबल इंजन सरकार” के बावजूद छत्तीसगढ़ में कर्मचारी इन सुविधाओं से वंचित हैं।
4000 करोड़ का प्रावधान, कर्मियों की अनदेखी
बजट में वी.बी.–जी राम जी योजना के लिए करीब 4000 करोड़ रुपये के प्रावधान की घोषणा की गई, लेकिन इस योजना को धरातल पर उतारने वाले कर्मचारियों के लिए कोई प्रोत्साहन या वेतन वृद्धि नहीं की गई। मनरेगा कर्मियों का कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि इस बजट में कम से कम वेतन वृद्धि की घोषणा होगी, लेकिन वह भी पूरी नहीं हुई।
आंदोलन की आहट
कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2022 में छत्तीसगढ़ मनरेगा कर्मचारी महासंघ द्वारा 72 दिनों की ऐतिहासिक हड़ताल और करीब 400 किलोमीटर की पदयात्रा की गई थी, जिसका व्यापक प्रभाव पड़ा था। अब वैसी ही परिस्थितियां दोबारा बनती नजर आ रही हैं।
क्यों नाखुश है कर्मचारी वर्ग
तीन वर्षों से वेतन वृद्धि नहीं, नियमितीकरण पर चुप्पी, संविदा कर्मचारियों की छंटनी, सेवा एवं सामाजिक सुरक्षा का अभाव और “समान काम समान वेतन” लागू न होने के कारण प्रदेश का सबसे बड़ा कर्मचारी वर्ग वर्तमान बजट और सरकार की नीतियों से असंतुष्ट है।

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