आंगनबाड़ी कार्यकर्ता–सहायिकाओं का दो दिन काम बंद, 9 मार्च को विधानसभा घेराव की चेतावनी
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मुंगेली |शासकीयकरण और सामाजिक सुरक्षा की मांग को लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं ने आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता–सहायिका संयुक्त मंच के आह्वान पर छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में 26 और 27 फरवरी को दो दिवसीय काम बंद कर धरना–प्रदर्शन किया गया।
मुंगेली में कार्यकर्ता–सहायिकाओं ने कलेक्टर के माध्यम से प्रधानमंत्री , मुख्यमंत्री , केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री और राज्य महिला एवं बाल विकास मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
50 साल से सेवा, लेकिन मानदेय बेहद कम
ज्ञापन में कहा गया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं पिछले 50 वर्षों से महिला एवं बाल विकास योजनाओं को घर-घर तक पहुंचा रही हैं। पोषण अभियान, टीकाकरण, कोविड महामारी और चुनाव जैसे अहम कार्यों में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
इसके बावजूद वर्तमान में कार्यकर्ता को ₹4500 और सहायिका को ₹2250 प्रतिमाह मानदेय ही दिया जा रहा है, जो सम्मानजनक जीवन के लिए नाकाफी है।
2018 के बाद नहीं बढ़ा मानदेय
संयुक्त मंच ने बताया कि 2018 के बाद से केंद्र सरकार ने मानदेय में कोई बढ़ोतरी नहीं की, वहीं छत्तीसगढ़ में भी बीते दो वर्षों में न तो मानदेय बढ़ाया गया और न ही कोई नई सुविधा दी गई।
शासकीयकरण, पेंशन, ग्रेच्युटी, समूह बीमा और कैशलेस इलाज जैसी बुनियादी सुविधाओं का आज तक लाभ नहीं मिला।
बजट से भी निराशा
कार्यकर्ता–सहायिकाओं का कहना है कि केंद्र सरकार के 2026–27 के बजट और राज्य सरकार के बजट में भी उनकी मांगों को जगह नहीं दी गई। इससे प्रदेश सहित देशभर की करीब 28 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ता–सहायिकाओं में नाराजगी बढ़ी है।
ये हैं प्रमुख मांगें
- आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं को शासकीय कर्मचारी घोषित किया जाए।
- शासकीयकरण तक कार्यकर्ता को ₹26,000 और सहायिका को ₹22,100 प्रतिमाह न्यूनतम वेतन दिया जाए।
- सेवानिवृत्ति पर पेंशन, ग्रेच्युटी, समूह बीमा और सामाजिक सुरक्षा के लिए स्पष्ट नीति बनाई जाए।
9 मार्च को राजधानी में बड़ा प्रदर्शन
संयुक्त मंच ने चेतावनी दी है कि यदि 8 मार्च तक मांगों पर निर्णय नहीं लिया गया, तो 9 मार्च 2026 को प्रदेशभर की लगभग एक लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ता–सहायिकाएं रायपुर पहुंचकर विधानसभा का घेराव करेंगी।
नेतृत्व ने कहा कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

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