अनुकंपा नियुक्ति में गड़बड़ी के आरोप,जांच की मांग लेकर संयुक्त संचालक से मिले अंकित गौरहा
रिपोर्टर ✒️ रूपचंद रॉय
बिलासपुर। जिला शिक्षा विभाग में अनुकंपा नियुक्ति को लेकर कथित फर्जीवाड़े का मामला अब संभागीय स्तर तक पहुंच गया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने संयुक्त संचालक शिक्षा विभाग आरपी आदित्य से मुलाकात कर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और शीघ्र जांच कराने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जांच में देरी हुई या मामले को दबाने की कोशिश की गई तो वह इस मुद्दे को हाईकोर्ट तक ले जाएंगे।
एक महीने से लंबित शिकायत पर उठे सवाल
संयुक्त संचालक से मुलाकात के दौरान गौरहा ने बताया कि उन्होंने लगभग एक माह पूर्व संभागायुक्त और संयुक्त संचालक शिक्षा विभाग को लिखित शिकायत देकर जांच की मांग की थी, लेकिन अब तक न तो शिकायत का कोई जवाब मिला और न ही किसी प्रकार की कार्रवाई की गई।उन्होंने कहा कि यदि मामले में लापरवाही बरती गई तो जिम्मेदार अधिकारियों को न्यायालय में जवाब देना होगा।
‘अनुकंपा नियुक्ति में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी’
अंकित गौरहा ने आरोप लगाया कि जिला शिक्षा विभाग में एक दर्जन से अधिक अनुकंपा नियुक्ति प्रकरणों में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। आरोप है कि पात्र आवेदकों को दरकिनार कर अपात्र लोगों को नौकरी दी गई और इस पूरी प्रक्रिया में कथित तौर पर भारी लेन-देन हुआ है।
गौरतलब है कि इस मामले में पहले भी केंद्रीय मंत्री तोखन साहू द्वारा कलेक्टर को जांच के निर्देश दिए गए थे। कलेक्टर के आदेश के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने अपने स्तर पर जांच के निर्देश जारी किए थे, लेकिन उस जांच प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
‘डीईओ की जांच बीईओ से कराना गलत’
गौरहा ने कहा कि जिस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी और स्थापना शाखा के बाबू सुनील यादव पर आरोप लगाए गए हैं, उसकी जांच ब्लॉक शिक्षा अधिकारी से कराना तकनीकी रूप से उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि जिला स्तर के अधिकारियों की जांच संभागीय स्तर की टीम से कराई जानी चाहिए, ताकि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी हो सके।
अन्य जिलों के आवेदकों की नियुक्ति का भी आरोप
गौरहा ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ मामलों में अन्य जिलों के आवेदकों को भी अनुकंपा नियुक्ति दी गई है, जो नियमों के खिलाफ है। उन्होंने पूरे मामले की व्यापक जांच की मांग की।
संयुक्त संचालक ने दिए जांच के संकेत
संयुक्त संचालक शिक्षा विभाग आरपी आदित्य ने कहा कि वह हाल ही में लंबी छुट्टी से लौटे हैं और संभव है कि शिकायत पत्र उनके संज्ञान में नहीं आया हो। उन्होंने तत्काल दोनों शिकायत पत्र मंगवाकर मामले की समीक्षा करने की बात कही।
उन्होंने आश्वासन दिया कि मामला गंभीर है और इसकी जांच के लिए जल्द ही एक टीम गठित की जाएगी। साथ ही उन्होंने यह भी माना कि जिला शिक्षा अधिकारी के खिलाफ शिकायत की जांच बीईओ स्तर पर कराना उचित नहीं है।
युक्तियुक्तकरण में भी गड़बड़ी का आरोप
मुलाकात के दौरान अंकित गौरहा ने जिले में चल रही युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया में भी कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के निर्देशों की अनदेखी करते हुए जिला स्तर पर इस प्रक्रिया में भारी गड़बड़ियां हुई हैं और कुछ मामलों में लेन-देन कर निर्णय बदले गए।
‘जरूरत पड़ी तो मुख्य सचिव और कोर्ट जाएंगे’
पत्रकारों से चर्चा में अंकित गौरहा ने कहा कि यदि जांच निष्पक्ष तरीके से नहीं हुई तो वह इस मामले को मुख्य सचिव के सामने रखेंगे और आवश्यकता पड़ने पर हाईकोर्ट में भी याचिका दायर करेंगे।



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