ग्राम पंचायत हसौद में झोलाछाप बंगाली डॉ. का अवैध क्लिनिक वर्षों से संचालित

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रिपोर्टर ✒️ तुला राम सहीस

प्रशासनिक अधिकारियों पर कार्यवाही नहीं करने का लग रहा गंभीर आरोप

सक्ती – जिले के अंतर्गत आने वाले ग्राम हसौद में एक कथित बंगाली झोलाछाप डॉक्टर का अवैध क्लिनिक पिछले कई दशकों से संचालित होने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिना वैध डिग्री और अनुमति के संचालित इस क्लिनिक में इलाज के नाम पर लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है, जिससे कई गंभीर घटनाएं और मौतें भी हो चुकी हैं।

जानकारी के अनुसार, पूर्व में भी इसी कथित बंगाली डॉक्टर द्वारा इलाज के दौरान एक वृद्ध महिला की मौत हो गई थी। उस समय मामला गंभीर होने पर पुलिस प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए आरोपी डॉक्टर को गिरफ्तार कर जेल भेजा था तथा उसके अवैध क्लिनिक को सील कर दिया गया था।

लेकिन हैरानी की बात यह है कि कुछ समय बाद आरोपी जमानत पर रिहा होकर वापस आ गया और प्रशासन द्वारा सील किए गए क्लिनिक को कथित तौर पर जबरन तोड़कर दोबारा अवैध रूप से क्लिनिक का संचालन शुरू कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि इसके बाद से यह झोलाछाप डॉक्टर लगातार गांव और आसपास के क्षेत्र के लोगों का इलाज कर रहा है, जबकि उसके पास किसी प्रकार की वैध चिकित्सा डिग्री या लाइसेंस नहीं है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस झोलाछाप डॉक्टर के इलाज के चक्कर में कई मरीजों की हालत बिगड़ी है और कुछ लोगों की जान भी जा चुकी है। बावजूद इसके प्रशासनिक स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।

ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस पूरे मामले की जानकारी स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों को कई बार दी जा चुकी है। साथ ही पत्रकारों द्वारा भी लगातार इस मुद्दे को समाचार पत्रों और मीडिया के माध्यम से उठाया गया है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई करने के बजाय केवल कार्यालयों में बैठकर तमाशा देखते नजर आ रहे हैं।

हाल ही में होली के दिन ग्राम हसौद में हुई एक बड़ी घटना ने एक बार फिर इस पूरे मामले को चर्चा में ला दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की होती तो ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता था।

अब क्षेत्र के लोगों में प्रशासन के प्रति भारी नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि जब पहले भी मौत और गिरफ्तारी जैसी घटनाएं हो चुकी हैं, तब भी आखिर किसके संरक्षण में यह अवैध क्लिनिक दोबारा संचालित हो रहा है।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर अवैध क्लिनिक को तत्काल बंद कराया जाए तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी निर्दोष व्यक्ति की जान से खिलवाड़ न हो।

अब देखना यह होगा कि समाचार सामने आने के बाद प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हुए क्या ठोस कदम उठाता है।

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