राज्यसभा चुनाव: लक्ष्मी वर्मा और फूलोदेवी नेताम का जाना तय, तीसरा नामांकन रद्द

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रायपुर । छत्तीसगढ़ की दो रिक्त राज्यसभा सीटों के लिए भाजपा की लक्ष्मी वर्मा और कांग्रेस की फूलोदेवी नेताम का राज्यसभा पहुंचना लगभग तय हो गया है। दोनों सीटों के लिए कुल तीन नामांकन दाखिल हुए थे, लेकिन तेलंगाना के एक व्यक्ति का नामांकन प्रस्तावक और समर्थक नहीं होने के कारण निरस्त कर दिया गया।

राज्यसभा चुनाव में इस बार सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण स्पष्ट रूप से हावी दिखाई दे रहे हैं। भाजपा ने पिछड़ा वर्ग से आने वाली लक्ष्मी वर्मा को उम्मीदवार बनाकर ओबीसी वोट बैंक को साधने की रणनीति अपनाई है, वहीं कांग्रेस ने आदिवासी नेता फूलोदेवी नेताम को दोबारा मौका देकर अपने पारंपरिक आदिवासी आधार को मजबूत करने का संदेश दिया है।

ओबीसी चेहरा होने से वर्मा को मौका

लक्ष्मी वर्मा लंबे समय से भाजपा संगठन में सक्रिय रही हैं और पिछड़ा वर्ग की प्रमुख महिला नेता मानी जाती हैं। वे जिला पंचायत अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। उनकी साफ-सुथरी छवि और संगठनात्मक सक्रियता को देखते हुए पार्टी ने उन्हें उम्मीदवार बनाया है। राजनीतिक हलकों में इसे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पसंद भी माना जा रहा है। भाजपा उन्हें संगठन के साथ महिला प्रतिनिधित्व के मजबूत चेहरे के रूप में आगे बढ़ा रही है।

आदिवासी आधार मजबूत करने की रणनीति

कांग्रेस की उम्मीदवार फूलोदेवी नेताम का भी लंबा राजनीतिक अनुभव रहा है। वे 1998 में अविभाजित मध्यप्रदेश विधानसभा की सदस्य रहीं और छत्तीसगढ़ गठन के बाद पहली विधानसभा में भी विधायक चुनी गईं। वर्ष 2016 से वे प्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष हैं। कांग्रेस ने 2023 के विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद कमजोर पड़े आदिवासी समर्थन को मजबूत करने के उद्देश्य से बस्तर क्षेत्र की इस महिला आदिवासी नेता पर भरोसा जताया है।

लंबी दावेदारी के बाद महिलाओं पर भरोसा

राज्यसभा के लिए कांग्रेस और भाजपा दोनों में कई नेताओं ने दावेदारी पेश की थी। हालांकि राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए दोनों दलों ने अपेक्षाकृत कम विवादित और संगठन में सक्रिय महिला चेहरों को प्राथमिकता दी। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह फैसला सामाजिक संदेश देने के साथ राजनीतिक संतुलन बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा है।

कुछ नेताओं ने खरीदे थे नामांकन फॉर्म

जानकारी के अनुसार भाजपा और कांग्रेस के एक-एक नेताओं ने पहले नामांकन फॉर्म खरीदे थे। इनमें भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी और कांग्रेस के पूर्व कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष का नाम शामिल बताया जा रहा है। दोनों एक ही क्षेत्र से जुड़े नेता बताए जा रहे हैं। हालांकि पार्टी द्वारा अधिकृत प्रत्याशियों की घोषणा के बाद उन्होंने नामांकन दाखिल नहीं किया।

भाजपा प्रत्याशी लक्ष्मी वर्मा के नामांकन पत्र में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव सहित वरिष्ठ नेताओं ने प्रस्तावक की भूमिका निभाई, जबकि अन्य विधायकों ने समर्थक के रूप में हस्ताक्षर किए।

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