कबीरधाम की छोटी मेहरा– जज्बे से जीता ‘गुण्डाधूर सम्मान’, बनीं महिला सशक्तिकरण की मिसाल

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संघर्ष, मेहनत और आत्मविश्वास से छोटी मेहरा बनीं बेटियों के लिए प्रेरणा

शारीरिक चुनौतियों को पीछे छोड़ पैरा-एथलेटिक्स में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बनाई पहचान
रिपोर्टर✒️कमलेश सिंह

कवर्धा छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले की धरती से निकली एक बेटी अपने हौसले, जुनून और कड़ी मेहनत से सफलता की नई मिसाल बन चुकी है। जिले के वार्ड क्रमांक 24 दर्रीपारा की रहने वाली कु. छोटी मेहरा ने अपनी शारीरिक चुनौतियों को पीछे छोड़ते हुए पैरा-एथलेटिक्स के क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन किया है। अपनी प्रतिभा और निरंतर प्रयासों के दम पर उन्होंने न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया है। आज उनकी संघर्ष और सफलता की कहानी नारी शक्ति, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प की एक प्रेरणादायक मिसाल बन गई है।

संघर्ष से सफलता तक का सफर

पिछले लगभग 6–7 वर्षों से पैरा-एथलेटिक्स के क्षेत्र में सक्रिय छोटी मेहरा ने यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी बाधा सफलता के रास्ते में दीवार नहीं बन सकती। सीमित संसाधनों और शारीरिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने हौसलों को कभी कमजोर नहीं होने दिया और लगातार अभ्यास के दम पर खेल जगत में अपनी अलग पहचान बनाई।

खेल के मैदान में शानदार उपलब्धियां

छोटी मेहरा ने गोला फेंक और चक्र फेंक प्रतियोगिताओं में अपनी विशेष पहचान बनाई है। उनकी मेहनत और प्रतिभा के कारण उन्होंने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर की कई प्रतियोगिताओं में स्वर्ण और रजत पदक जीतकर छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया है। उनकी उत्कृष्ट उपलब्धियों को देखते हुए छत्तीसगढ़ शासन द्वारा वर्ष 2024 में उन्हें राज्य के प्रतिष्ठित अलंकरण गुण्डाधूर सम्मान से सम्मानित किया गया। यह सम्मान खेल के क्षेत्र में राज्य के सर्वोच्च सम्मानों में से एक माना जाता है।

बेटियों के लिए प्रेरणा

कबीरधाम जिले के एक छोटे से वार्ड से निकलकर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंच तक पहुंचना छोटी मेहरा की असाधारण मेहनत और आत्मविश्वास का परिणाम है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि सपनों को पूरा करने के लिए परिस्थितियां नहीं, बल्कि मजबूत संकल्प और निरंतर प्रयास जरूरी होते हैं।

नारी शक्ति का प्रतीक

आज छोटी मेहरा केवल एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि नारी शक्ति और आत्मनिर्भरता की प्रतीक बन चुकी हैं। उनकी कहानी उन हजारों बेटियों को प्रेरित करती है जो सीमित संसाधनों और चुनौतियों के बावजूद अपने सपनों को साकार करने का साहस रखती हैं। छोटी मेहरा की उपलब्धि केवल उनकी व्यक्तिगत जीत नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की हर उस बेटी की जीत है जो अपने सपनों को साकार करने के लिए हर बाधा को पार करने का हौसला रखती है।

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