राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अपमान पर ममता बनर्जी माफी मांगें : नीलकंठ टेकाम

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रायपुर। पश्चिम बंगाल में आयोजित 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कथित अपमान को लेकर भाजपा नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। विधायक नीलकंठ टेकाम ने कहा कि यह घटना न केवल अशिष्ट आचरण की पराकाष्ठा है, बल्कि देश के लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक मर्यादाओं का भी अपमान है।

मंगलवार को एकात्म परिसर स्थित भाजपा कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में विधायक टेकाम ने कहा कि देश की प्रथम नागरिक राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मू के साथ जिस प्रकार का व्यवहार पश्चिम बंगाल सरकार ने किया है, उसने पूरे देश के आदिवासी समाज और महिलाओं को आहत किया है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को इस घटना के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, आदिवासी समाज और देशभर की मातृशक्ति से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।

टेकाम ने कहा कि यह संभवतः पहली बार है जब देश की राष्ट्रपति किसी राज्य के दौरे पर हों और वहां की मुख्यमंत्री या कोई वरिष्ठ मंत्री उनके स्वागत के लिए उपस्थित न हो। उन्होंने इसे महज प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि राष्ट्रपति पद और संविधान का अपमान बताया। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि पहले से तय सिलीगुड़ी के बिधाननगर जैसे स्थल को अंतिम समय में बदलकर बागडोंगरा के गोसाईंनपुर जैसे छोटे और दुर्गम स्थान पर क्यों किया गया।

विधायक टेकाम ने कहा कि भारत के इतिहास में पहली बार एक आदिवासी महिला देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन हुई हैं। ऐसे में उनका सम्मान करना सभी का दायित्व है। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी की राजनीति ने संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को भी चुनौती दी है।

उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में कांग्रेस और इंडी गठबंधन के कुछ नेताओं द्वारा भी देश के सर्वोच्च पद को लेकर अमर्यादित टिप्पणियां की गई हैं। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी द्वारा राष्ट्रपति को “राष्ट्रपत्नी” कहना और पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को “रबर स्टैंप” कहना इसी मानसिकता को दर्शाता है।

11 मार्च तक देशभर में ममता बनर्जी का पुतला दहन : विकास मरकाम

पत्रकार वार्ता की शुरुआत में आदिवासी स्वास्थ्य परम्पराएँ एवं औषधीय पादप बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम ने भी इस मामले को लेकर ममता बनर्जी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति के कार्यक्रम के दौरान प्रोटोकॉल का उल्लंघन और अव्यवस्था तृणमूल कांग्रेस की राजनीतिक साजिश प्रतीत होती है।

मरकाम ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का अपमान न केवल संविधान और लोकतंत्र की मूल भावना का अपमान है, बल्कि देश के पूरे आदिवासी समाज और महिलाओं का भी अपमान है। इस घटना से देशभर के आदिवासी समाज में आक्रोश है।

उन्होंने बताया कि भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के तत्वावधान में 11 मार्च तक देशभर के सभी जिलों में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का पुतला दहन कर विरोध दर्ज कराया जाएगा।

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