अमरकंटक के काटजू ग्राम बराती में प्रवाहित हो रही श्रीमद् भागवत कथा की अमृतधारा ,

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गीता स्वाध्यायी आश्रम से नर्मदा मंदिर तक निकाली गई शोभायात्रा ,

कथा श्रवण कर भक्त , श्रद्धालु हो रहे भाव विभोर

संवाददाता – श्रवण कुमार उपाध्याय

अमरकंटक – मां नर्मदा जी की उद्गम स्थली/पवित्र नगरी अमरकंटक जो मध्य प्रदेश के प्रमुख पर्यटन एवं धार्मिक तीर्थ स्थलो में से एक पवित्र नगरी अमरकंटक के नगर परिषद क्षेत्र अंतर्गत वार्ड क्रमांक 4 काटजू ग्राम बराती में इन दिनों भक्ति , ज्ञान और आध्यात्म का अनुपम संगम देखने को मिल रहा है ।


प्रथम दिवस गीता स्वाध्याय आश्रम के स्वामी नर्मदानंद जी महाराज की संरक्षण में आश्रम से नर्मदा मंदिर तक विशाल शोभायात्रा और कलश यात्रा ढोल नगाड़ों और आतिशबाजी के बीच मंदिर में पूजन उपरांत कथा स्थल पहुंच कलश स्थापना की गई ।
यहां पधारे वृंदावन धाम के सुप्रसिद्ध कथा वाचक पंडित आशुतोष जी महाराज के श्रीमुख से सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत महापुराण की संगीतमय एवं रसपूर्ण कथा का भव्य आयोजन किया जा रहा है । कथा के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं , भक्तों की निष्काम भक्ति और धर्म के गूढ़ आध्यात्मिक सिद्धांतों का भावपूर्ण वर्णन किया जा रहा है जिससे क्षेत्र का वातावरण पूर्णतः भक्तिमय हो रहा है ।
यह पावन आयोजन श्री पीठम आश्रम अमरकंटक के तत्वावधान में पंडित शिवानंद जी महाराज के पावन सानिध्य में संपन्न हो रहा है । यह कथा सात दिवसीय श्रीमद् भागवत महापुराण कथा का शुभारंभ 10 मार्च से प्रारंभ होकर 16 मार्च 2026 तक प्रतिदिन दोपहर 02 बजे से शायं 06 बजे तक श्रद्धा , भक्ति और आध्यात्मिक

वातावरण के बीच आयोजित की जा रही है । कथा स्थल पर प्रतिदिन प्रातः से ही श्रद्धालुओं की उपस्थिति आरंभ हो जाती है और संध्या तक भक्तजन कथा श्रवण कर आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त कर रहे हैं ।
आयोजक अविनाश कुमार साहू एवं साहू परिवार द्वारा यह धार्मिक आयोजन स्वर्गीय श्री रघुवर प्रसाद दीक्षित एवं श्रीमती निर्मला दीक्षित की पावन पुण्य स्मृति में कराया जा रहा है । परिवारजनों का मानना है कि श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण और आयोजन मानव जीवन में सद्गुण , सेवा , करुणा और भक्ति की भावना को जागृत करता है तथा दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए भी अत्यंत पुण्यदायी माना गया है ।
कथा के द्वितीय दिवस व्यासपीठ से पंडित आशुतोष जी महाराज ने कुंती स्तुति , भीष्म स्तुति तथा परम वैरागी श्री शुकदेव जी महाराज के आगमन का अत्यंत सरस , सरल और भावपूर्ण वर्णन किया है । उन्होंने बताया कि महाभारत के पश्चात जब भीष्म पितामह शरशैय्या पर लेटे हुए थे तब उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की महिमा का गुणगान करते हुए भीष्म स्तुति के माध्यम से भक्तिभाव का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया । वहीं कुंती माता ने भगवान से विपत्तियां देने की प्रार्थना करते हुए यह संदेश दिया कि संकट के समय ही मनुष्य सच्चे मन से प्रभु का स्मरण करता है ।
कथा में आगे बताया गया कि राजा परीक्षित को जब अपने जीवन के अंतिम सात दिनों का ज्ञान हुआ तब उन्होंने समस्त सांसारिक मोह त्याग कर भगवान की कथा सुनने का संकल्प लिया । उस समय परम ज्ञानी और वैराग्य के प्रतीक शुकदेव जी महाराज प्रकट हुए और उन्होंने सात दिनों तक श्रीमद् भागवत महापुराण का दिव्य उपदेश दिया । इसी प्रसंग से श्रीमद् भागवत कथा श्रवण की परंपरा प्रारंभ मानी जाती है ।
पंडित आशुतोष जी महाराज ने कहा कि श्रीमद् भागवत महापुराण को वेदों और पुराणों का सार माना गया है । इसमें भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं के साथ-साथ भक्ति , ज्ञान और वैराग्य का अद्भुत समन्वय मिलता है । भागवत कथा का श्रवण मनुष्य के अंतःकरण को शुद्ध करता है । जीवन में सकारात्मकता लाता है और ईश्वर के प्रति अटूट श्रद्धा एवं विश्वास को दृढ़ करता है ।
कथा के दौरान संगीतमय भजनों , हरिनाम संकीर्तन और भगवान श्रीकृष्ण के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है । उपस्थित श्रद्धालु भक्त कथा के प्रत्येक प्रसंग को भावपूर्वक सुनते हुए आध्यात्मिक आनंद का अनुभव कर रहे हैं । बड़ी संख्या में महिला , पुरुष एवं युवा श्रद्धालु कथा में पहुंचकर धर्म , संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़ने का अवसर प्राप्त कर रहे हैं ।
आयोजकों ने क्षेत्र के समस्त श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर श्रीमद् भागवत महापुराण कथा का श्रवण करें और इस दुर्लभ आध्यात्मिक अवसर का लाभ प्राप्त कर अपने जीवन को मंगलमय करें ।

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