सियासी दूरियां मिटीं, लोरमी में एक दूजे को गुलाल लगाते नजर आए प्रतिद्वंद्वी अरुण साव और सागर सिंह बैस
लोरमी– फागुन की बयार और रंगों के त्योहार होली ने आज लोरमी की फिजा में आपसी प्रेम और भाईचारे का ऐसा रंग घोला कि राजनीति की कड़वाहट पीछे छूट गई। विधानसभा चुनाव में एक-दूसरे के खिलाफ ताल ठोकने वाले दिग्गज नेता आज एक ही मंच पर गुलाल से सराबोर नजर आए। लोरमी विधानसभा क्षेत्र के मंगलम भवन में आयोजित भव्य होली मिलन समारोह उस समय यादगार बन गया जब प्रदेश के उपमुख्यमंत्री अरुण साव और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के नेता सागर सिंह बैस ने एक-दूसरे को गले लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं।

इस खास मौके पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने अपने चिरपरिचित अंदाज में फाग गीतों की धुन पर थिरकते हुए क्षेत्रवासियों के साथ खुशियां बांटीं। चुनावी मैदान में भले ही ये दोनों नेता अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं का प्रतिनिधित्व करते रहे हों, लेकिन त्योहार के इस संगम ने यह साबित कर दिया कि वैचारिक मतभेद व्यक्तिगत संबंधों और सामाजिक समरसता के आड़े नहीं आते। सागर सिंह बैस ने भी गर्मजोशी दिखाते हुए उपमुख्यमंत्री का स्वागत किया और दोनों ने काफी देर तक एक साथ बैठकर क्षेत्र की सुख-समृद्धि पर चर्चा की।

समारोह में उपस्थित कार्यकर्ताओं और आम जनता के लिए यह दृश्य किसी उत्सव से कम नहीं था क्योंकि चुनावी सरगर्मी के बाद अक्सर नेताओं के बीच दूरियां बन जाती हैं, मगर लोरमी की माटी ने आज एकता की एक नई मिसाल पेश की।

उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि लोरमी की धरती हमेशा से प्रेम और भाईचारे की प्रतीक रही है और मंगलम भवन का यह मंच आज उस एकता का गवाह बन रहा है। उन्होंने सागर सिंह बैस के साथ गर्मजोशी से मुलाकात की और चुनाव की कड़वाहट को दरकिनार कर क्षेत्र के विकास और जनहित के मुद्दों पर सहज चर्चा की।
समारोह के दौरान मंगलम भवन फाग गीतों और नगाड़ों की थाप से गूंज उठा। सागर सिंह बैस ने भी उपमुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए कहा कि राजनीति अपनी जगह है, लेकिन सामाजिक रिश्तों और त्योहारों की मर्यादा सर्वोपरि है। इस मिलन समारोह में उपस्थित नागरिकों ने भी इस दृश्य की जमकर सराहना की, क्योंकि अक्सर चुनावी प्रतिस्पर्धा के बाद नेताओं के बीच दूरियां देखी जाती हैं, परंतु यहाँ दृश्य इसके बिल्कुल विपरीत था।

कार्यक्रम के अंत तक पूरा वातावरण अबीर-गुलाल और आपसी सद्भाव की खुशबू से महकता रहा, जिसने यह संदेश दिया कि लोकतंत्र में प्रतिद्वंद्विता सिर्फ मतों तक सीमित है, मन तक नहीं।

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