LPG की कमी से बढ़ती चिंता के बीच ऊर्जा सुरक्षा में कोयले की अहम भूमिका
रिपोर्टर ✒️ रानू बैरागी
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और समुद्री मार्गों में उत्पन्न बाधाओं के कारण भारत में LPG आपूर्ति पर प्रत्यक्ष प्रभाव देखने को मिला है। कई शहरों में उपभोक्ताओं ने यह शिकायत की कि IVRS, मोबाइल ऐप और व्हाट्सऐप‑आधारित बुकिंग चैनल बार‑बार फेल हो रहे हैं और लगातार सर्वर डाउन का संदेश प्रदर्शित कर रहे हैं। इस स्थिति ने उपभोक्ताओं में चिंता बढ़ा दी, जिसके चलते गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लगनी शुरू हो गईं। कई डिस्ट्रीब्यूटर्स ने बताया कि सामान्य दिनों की तुलना में बुकिंग की संख्या लगभग दस गुना तक बढ़ गई है, जिससे तकनीकी सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव पड़ गया और डिलीवरी की गति भी धीमी हुई।
घरेलू LPG वितरण को प्राथमिकता देते हुए सरकार ने स्पष्ट किया है कि सप्लाई बंद नहीं हुई है, हालांकि बढ़ी हुई मांग और घबराहट में की जा रही बुकिंग के कारण डिलीवरी प्रभावित हुई है। वाणिज्यिक LPG की उपलब्धता कई शहरों में कम हो गई है, जिसका असर रेस्टोरेंट, कैटरिंग सेवाओं, हॉस्टलों और अन्य प्रतिष्ठानों पर पड़ा है। केरल जैसे राज्यों में उद्योग संगठनों ने कहा है कि यदि स्थिति जल्द सुधरी नहीं, तो लगभग 40 प्रतिशत रेस्टोरेंट अस्थायी रूप से बंद हो सकते हैं। इस स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने घरेलू उपयोग के लिए केरोसिन और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों में कोयले के उपयोग की अस्थायी अनुमति प्रदान की है, ताकि और अधिक दबाव न बढ़े।
देशभर में LPG बुकिंग प्लेटफॉर्म पर बढ़ते भार के बीच डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों में भी वृद्धि देखी जा रही है, जिस पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने उपभोक्ताओं को सतर्क करते हुए केवल आधिकारिक चैनलों के माध्यम से बुकिंग करने की अपील जारी की। इस संकट के समानांतर कई रिटेलर्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ने इंडक्शन कुकटॉप, इलेक्ट्रिक राइस कुकर और इलेक्ट्रिक केटल जैसे उपकरणों की बिक्री में तेज उछाल की पुष्टि की है, क्योंकि घरों ने वैकल्पिक व्यवस्था अपनानी शुरू कर दी है।
LPG की आपूर्ति में इस अचानक आए दबाव और इससे जुड़ी सार्वजनिक चिंता ने एक बड़ी बात स्पष्ट कर दी है—ऊर्जा सुरक्षा के लिए घरेलू संसाधनों की विश्वसनीयता। भारत अपने कुल LPG उपभोग का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है, और यह आयात उन्हीं समुद्री मार्गों से होता है जो वर्तमान युद्ध और भू‑राजनीतिक तनाव के चलते प्रभावित हुए हैं। ऐसे समय में घरेलू संसाधन, विशेषकर कोयला, एक स्थिर आधार के रूप में सामने आता है। कोयला न केवल पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है, बल्कि इसका उत्पादन पूरी तरह घरेलू है और इसकी सप्लाई बाहरी परिस्थितियों पर निर्भर नहीं रहती।
भारत की बिजली उत्पादन प्रणाली में कोयले का योगदान लगभग 70 प्रतिशत है, जो यह सुनिश्चित करता है कि अस्पताल, उद्योग, सार्वजनिक परिवहन और घरेलू उपभोक्ताओं को आवश्यक बिजली निर्बाध रूप से मिलती रहे। मौजूदा परिस्थितियों में घरों में इंडक्शन या अन्य इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरणों के उपयोग में तेजी आई है, और इन उपकरणों को चलाने वाली बिजली का बड़ा हिस्सा कोयला आधारित संयंत्रों से ही प्राप्त होता है। इस तरह प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों रूपों में कोयला देश की ऊर्जा निरंतरता और जीवनचर्या को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
वर्तमान LPG दबाव ने यह संदेश और स्पष्ट कर दिया है कि भारत जैसे बड़े और तेजी से बढ़ते देश के लिए ऊर्जा आत्मनिर्भरता किसी भी चुनौतीपूर्ण दौर में सामरिक शक्ति का महत्त्वपूर्ण स्तंभ है। संकट के समय घरेलू कोयला भंडार न केवल विकल्प प्रदान करते हैं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा की मजबूत नींव साबित होते हैं। हालात इस ओर संकेत करते हैं कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच घरेलू संसाधनों को मजबूती देना आज की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में किसी भी आपूर्ति संकट के बावजूद देश की ऊर्जा व्यवस्था स्थिर बनी रहे।

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