नगर पंचायत पथरिया में वित्तीय गड़बड़ी का आरोप, कलेक्टर से उच्च स्तरीय जांच की मांग

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आरटीआई में सामने आया भुगतान का अंतर, शासकीय धन के संभावित गबन और कूटरचना की आशंका

मुंगेली । मुंगेली जिले की नगर पंचायत पथरिया में शासकीय राशि के संभावित गबन और वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आने के बाद जांच की मांग उठने लगी है। पथरिया निवासी संपत जायसवाल ने जिला कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपकर पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराने और दोषियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग की है।

शिकायत में बताया गया है कि सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नगर पंचायत पथरिया से प्राप्त वित्तीय अभिलेखों का अध्ययन करने पर एक गंभीर वित्तीय अनियमितता सामने आई है। दस्तावेजों के अनुसार नगर पंचायत के चेक पंजी और कैश बुक में पटेल बोरवेल्स के नाम से 96 हजार 515 रुपये का भुगतान दर्ज किया गया है, जबकि उसी भुगतान से संबंधित बंधन बैंक के बैंक स्टेटमेंट में 9 लाख 65 हजार 150 रुपये की राशि आहरित होना दर्शाया गया है।

इस प्रकार दर्ज राशि और बैंक से निकाली गई वास्तविक राशि के बीच लगभग 8 लाख 68 हजार 635 रुपये का अंतर पाया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि यह अंतर शासकीय धन के संभावित गबन या वित्तीय कूटरचना की ओर संकेत करता है।

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि नगर पंचायत पथरिया से जब इस भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की जानकारी मांगी गई तो संबंधित नोटशीट, बिल और वाउचर अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए जा सके। नगर पंचायत द्वारा इन दस्तावेजों के उपलब्ध नहीं होने अथवा गायब होने की जानकारी दी गई है। इसे शासकीय अभिलेखों के संरक्षण और वित्तीय नियमों का गंभीर उल्लंघन बताया गया है।

शिकायतकर्ता के अनुसार प्रथम दृष्टया यह मामला वित्तीय अभिलेखों में हेरफेर, कूटरचना और शासकीय धन के संभावित गबन की आशंका को दर्शाता है। उनका कहना है कि यह कृत्य न केवल शासकीय वित्तीय नियमों का उल्लंघन है, बल्कि आपराधिक दायित्व की श्रेणी में भी आता है।

कलेक्टर को दिए गए आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि यह मामला भारतीय न्याय संहिता 2023 की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत दंडनीय हो सकता है। इसमें आपराधिक न्यासभंग (क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट) की धारा 316, धोखाधड़ी की धारा 318 तथा कूटरचना और कूटरचित दस्तावेजों के उपयोग से संबंधित धाराएं शामिल हैं। इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) के प्रावधान भी लागू हो सकते हैं।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि मामला भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 के तहत संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है, इसलिए इस पर पुलिस द्वारा प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज किया जाना आवश्यक है।

शिकायतकर्ता ने कलेक्टर से पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। साथ ही नगर पंचायत पथरिया के संबंधित वित्तीय लेनदेन का विशेष या फॉरेंसिक ऑडिट कराने का भी आग्रह किया गया है, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

इसके अतिरिक्त संबंधित भुगतान से जुड़े नोटशीट, बिल और वाउचर अभिलेखों के गायब होने के मामले की अलग से जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने की मांग भी की गई है। यदि जांच में वित्तीय अनियमितता या शासकीय धन के गबन की पुष्टि होती है तो दोषियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज कर कठोर कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है।

शिकायतकर्ता ने प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग तथा लोकायुक्त संगठन से कराने की भी मांग की है। उनका कहना है कि यह मामला शासकीय धन की पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन और जनता के विश्वास से जुड़ा हुआ है, इसलिए इस पर निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई जरूरी है।

इस संबंध में शिकायत के साथ सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त दस्तावेजों, बैंक स्टेटमेंट और चेक पंजी तथा कैशबुक की प्रतियां भी संलग्न की गई हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और जांच के बाद वास्तविक स्थिति क्या सामने आती है।

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