न्यायपालिका की शक्ति दक्षता, निष्पक्षता और समर्पण में निहित – मुख्य न्यायाधीश
दुर्ग में संभागीय न्यायिक सेमीनार, आधुनिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर
रिपोर्टर: कमलेश सिंह
कवर्धा/दुर्ग। छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी द्वारा दुर्ग संभाग के न्यायिक अधिकारियों के लिए एक दिवसीय संभागीय न्यायिक सेमीनार का आयोजन जिला न्यायालय, दुर्ग में किया गया। सेमीनार में संभाग के पांच सिविल जिलों से 92 न्यायिक अधिकारियों ने सहभागिता की और विभिन्न समकालीन विधिक विषयों पर विचार-विमर्श किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा, मुख्य न्यायाधिपति, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने दीप प्रज्वलित कर सेमीनार का शुभारंभ किया। इस अवसर पर न्यायमूर्ति रजनी दुबे एवं न्यायमूर्ति रवीन्द्र कुमार अग्रवाल की गरिमामयी उपस्थिति रही।
अपने संबोधन में मुख्य न्यायाधिपति ने कहा कि न्यायपालिका की वास्तविक शक्ति उसकी दक्षता, निष्पक्षता और न्याय के प्रति अटूट समर्पण में निहित है। उन्होंने नव अधिनियमित आपराधिक कानूनों को न्याय प्रणाली के आधुनिकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि इनमें तकनीकी प्रगति और पीड़ित-केंद्रित दृष्टिकोण को प्रमुखता दी गई है। उन्होंने न्यायिक अधिकारियों को इन कानूनों की व्यावहारिक समझ विकसित करने और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने की सलाह दी।
सेमीनार में परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 से संबंधित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण के लिए आधुनिक प्रबंधन तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया गया। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डालते हुए न्यायिक अधिकारियों को डिजिटल साक्ष्यों की वैधानिक ग्राह्यता एवं प्रावधानों की जानकारी से अद्यतन रहने की आवश्यकता बताई गई।
कार्यक्रम में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, दुर्ग ने स्वागत भाषण देते हुए निरंतर न्यायिक प्रशिक्षण और विचार-विनिमय को आवश्यक बताया। वहीं अकादमी के निदेशक ने सेमीनार के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बदलते कानूनी परिदृश्य में क्षमता निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया।
सेमीनार का एक महत्वपूर्ण क्षण “मध्यस्थता 2.0 IAISAGR – दुर्ग के लिए मध्यस्थता रणनीति मॉडल” प्रकाशन का विमोचन रहा, जिसका अनावरण मुख्य न्यायाधिपति के करकमलों से किया गया। इस अवसर को न्यायिक प्रणाली में वैकल्पिक विवाद समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा गया।
सेमीनार के दौरान विभिन्न विधिक विषयों पर प्रस्तुतिकरण दिए गए, जिनमें सिविल प्रक्रिया संहिता के प्रावधान, निष्पादन प्रकरणों के शीघ्र निराकरण की रणनीतियां, परक्राम्य लिखत अधिनियम के अंतर्गत मामलों का निपटारा, तथा नवीन आपराधिक कानूनों के प्रावधान शामिल रहे। इसके साथ ही एक रिफ्रेशर कोर्स का आयोजन भी किया गया, जिसमें भारतीय न्याय संहिता एवं भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में दुर्ग, बालोद, बेमेतरा, कवर्धा एवं राजनांदगांव जिलों के न्यायिक अधिकारियों के साथ उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल एवं अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे। सेमीनार का उद्देश्य न्यायिक अधिकारियों के ज्ञान और कौशल को समृद्ध कर न्यायिक प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी और समयबद्ध बनाना रहा।

The News Related To The News Engaged In The www.apnachhattisgarh.com Web Portal Is Related To The News Correspondents The Editor Does Not Necessarily Agree With These Reports The Correspondent Himself Will Be Responsible For The News.


