विदेशी मुद्रा भंडार में जोरदार उछाल, 697 अरब डॉलर के पार पहुंचा भंडार
नई दिल्ली । देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत सामने आया है। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 3 अप्रैल को समाप्त हुए सप्ताह में 9.063 अरब डॉलर की उल्लेखनीय बढ़ोतरी के साथ 697.121 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है। यह जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा शुक्रवार को जारी साप्ताहिक आंकड़ों में दी गई।
गौरतलब है कि इससे पहले वाले सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार में 10.288 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई थी। उस गिरावट का मुख्य कारण फॉरेन करेंसी एसेट्स (एफसीए) के मूल्य में कमी आना था। हालांकि ताजा आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि देश की बाहरी वित्तीय स्थिति में फिर से मजबूती लौट रही है।
गोल्ड रिजर्व में सबसे बड़ी छलांग
आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार के प्रमुख घटकों में इस सप्ताह सबसे अधिक बढ़ोतरी स्वर्ण भंडार (गोल्ड रिजर्व) में दर्ज की गई। इसकी वैल्यू 7.221 अरब डॉलर बढ़कर 120.742 अरब डॉलर तक पहुंच गई है। यह बढ़ोतरी अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में आई तेजी और भंडारण में वृद्धि का परिणाम मानी जा रही है।
एफसीए में भी सुधार, डॉलर समेत प्रमुख मुद्राएं शामिल
विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा फॉरेन करेंसी एसेट्स (एफसीए) होता है। इस सप्ताह इसमें 1.784 अरब डॉलर की वृद्धि दर्ज की गई, जिससे इसका कुल मूल्य 552.856 अरब डॉलर हो गया है।
एफसीए में अमेरिकी डॉलर के अलावा वैश्विक स्तर पर प्रचलित प्रमुख मुद्राएं जैसे येन, यूरो और पाउंड शामिल होते हैं, जिन्हें डॉलर में आंका जाता है। यह घटक किसी भी देश की बाहरी आर्थिक मजबूती को दर्शाने में अहम भूमिका निभाता है।
एसडीआर में हल्की बढ़ोतरी, आईएमएफ स्थिति स्थिर
आरबीआई के अनुसार, विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) में 5.8 करोड़ डॉलर की मामूली बढ़ोतरी हुई है और यह 18.707 अरब डॉलर पर पहुंच गया है।
वहीं, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) में भारत की रिजर्व पोजिशन में कोई बदलाव नहीं हुआ है और यह 4.816 अरब डॉलर पर स्थिर बनी हुई है।
आर्थिक मजबूती का संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी मुद्रा भंडार में यह वृद्धि देश की मजबूत आर्थिक स्थिति का संकेत है। यह न केवल भारत की वित्तीय स्थिरता को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर निवेशकों के भरोसे को भी मजबूत करता है।
विदेशी मुद्रा भंडार का उच्च स्तर किसी भी देश के लिए सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। इससे—
- अंतरराष्ट्रीय भुगतान संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है
- आयात के लिए पर्याप्त विदेशी मुद्रा उपलब्ध रहती है
- आर्थिक संकट की स्थिति में स्थिरता बनी रहती है
रुपये को सहारा देने में अहम भूमिका
जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर के मुकाबले रुपये पर दबाव बढ़ता है, तब केंद्रीय बैंक विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग कर बाजार में हस्तक्षेप करता है। इससे रुपये की गिरावट को नियंत्रित किया जाता है और विनिमय दर को स्थिर बनाए रखा जाता है।
व्यापार और निवेश के लिए सकारात्मक संकेत
विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी यह भी दर्शाती है कि देश में विदेशी निवेश और डॉलर की आवक मजबूत बनी हुई है। इससे न केवल आयात-निर्यात गतिविधियों को बल मिलता है, बल्कि भारत की वैश्विक व्यापारिक स्थिति भी सुदृढ़ होती है।

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