संगीता तिवारी हत्याकांड: 27 गवाह, 7 डॉक्टरों की गवाही और ‘डाइंग डिक्लेरेशन’ के आधार पर पति को उम्रकैद
मुंगेली । जिला एवं सत्र न्यायालय मुंगेली ने बहुचर्चित संगीता तिवारी हत्याकांड में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आरोपी पति पवन तिवारी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय की न्यायाधीश गिरिजादेवी मेरावी ने यह निर्णय सुनाते हुए स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत सशक्त साक्ष्य, गवाहों के बयान और मृतका के ‘मरणासन्न कथन’ (डाइंग डिक्लेरेशन) के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराया गया।
दीपावली की रात बना दर्दनाक हादसा
मामला 12 नवंबर 2023 का है, जब दीपावली के उत्सव के बीच ग्राम मसना में एक परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। मामूली घरेलू विवाद के चलते आरोपी पवन तिवारी ने अपनी पत्नी संगीता तिवारी पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी। गंभीर रूप से झुलसी संगीता को उपचार के लिए रायपुर ले जाया गया, जहां लगभग दो महीने तक जीवन और मौत से संघर्ष करने के बाद 21 जनवरी 2024 को उनकी मृत्यु हो गई।
अभियोजन की मजबूत पैरवी बनी निर्णायक
इस सनसनीखेज मामले में अभियोजन पक्ष ने बेहद सशक्त ढंग से अपना पक्ष रखा।
- कुल 27 गवाहों के बयान न्यायालय में प्रस्तुत किए गए।
- 7 विशेषज्ञ डॉक्टरों ने मेडिकल साक्ष्य देते हुए मृतका की स्थिति, जलन की गंभीरता और बयान देने की क्षमता की पुष्टि की।
लोक अभियोजक रजनीकांत सिंह ठाकुर ने प्रभावी पैरवी करते हुए मामले को तार्किक और साक्ष्य-आधारित तरीके से प्रस्तुत किया, जबकि विवेचक अखिलेश वैष्णव द्वारा की गई बारीकी से जांच और साक्ष्यों का सटीक संकलन इस केस की रीढ़ साबित हुआ।
‘डाइंग डिक्लेरेशन’ बना सबसे बड़ा सबूत
न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि मृतका संगीता द्वारा मजिस्ट्रेट के समक्ष दिया गया ‘मरणासन्न कथन’ इस मामले का सबसे मजबूत और निर्णायक साक्ष्य है।
संगीता ने अपने बयान में स्पष्ट रूप से बताया था कि उसके पति ने ही उस पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगाई थी।
भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 32(1) के तहत इस बयान को ठोस साक्ष्य मानते हुए न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराया।
न्यायालय का फैसला: एक नजर में
- दोषी: पवन तिवारी (पति)
- सजा: भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास
- दोषमुक्त: साक्ष्यों के अभाव में सास और ससुर को बरी किया गया
अनाथ बेटियों के लिए राहत
न्यायालय ने संवेदनशील रुख अपनाते हुए मृतका की दो बेटियों के भरण-पोषण और शिक्षा के लिए पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के तहत मुआवजा प्रदान करने का निर्देश जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को दिया है।
समाज के लिए कड़ा संदेश
यह फैसला न केवल एक पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने का उदाहरण है, बल्कि घरेलू हिंसा के खिलाफ एक सख्त संदेश भी देता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे जघन्य अपराधों में किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी।

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