अमरकंटक में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धा-भक्ति से मनाई गई भगवान परशुराम जयंती

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संवाददाता – श्रवण कुमार उपाध्याय

अमरकंटक – मां नर्मदा जी की उद्गम स्थली , पवित्र नगरी अमरकंटक के श्री नर्मदा मंदिर प्रांगण में भगवान आदिराम परशुराम ब्रह्मर्षि जी की पावन जयंती पर्व अत्यंत श्रद्धा , भक्ति और उत्साह पूर्ण वातावरण में वैदिक परंपराओं के अनुरूप भव्यता के साथ संपन्न हुआ । इस अवसर पर संपूर्ण वातावरण में वैदिक मंत्रोच्चार , धार्मिक आस्था और उत्साह से गुंजायमान रहा ।

नर्मदा मंदिर प्रांगण में भगवान परशुराम के पूजन-अर्चन हेतु विशेष अनुष्ठान का आयोजन किया गया । अमरकंटक के प्रकांड विद्वानों आचार्य पुरोहितों एवं श्री नर्मदा मंदिर के प्रधान पुजारीगण पंडित उमेश द्विवेदी , पंडित कामता प्रसाद द्विवेदी एवं पंडित धनेश द्विवेदी के सानिध्य में वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ विधि-विधानपूर्वक विशेष पूजा-अर्चना संपन्न हुई । इस दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान परशुराम जी के प्रति अपनी अटूट आस्था व्यक्त करते हुए मंगलकामनाएं कीं ।

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इसके पश्चात नर्मदा मंदिर प्रांगण से एक भव्य एवं विशाल शोभायात्रा का शुभारंभ किया गया । यह शोभायात्रा नगर के विभिन्न मार्गों से होती हुई पूरे अमरकंटक नगर का भ्रमण करते हुए श्री कल्याण सेवा आश्रम पहुंच कर तथा पुनः वापस नर्मदा मंदिर में आकर संपन्न हुई । शोभायात्रा में हजारों की संख्या में विप्र समाज एवं श्रद्धालुजन उत्साहपूर्वक शामिल हुए । जगह-जगह श्रद्धालुओं द्वारा स्वागत , पुष्पवर्षा एवं जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा ।

कार्यक्रम के दौरान शांतिकुंटी आश्रम के प्रमुख महामंडलेश्वर स्वामी रामभूषण दास जी महाराज एवं पंडित उमेश द्विवेदी ने अपने-अपने संबोधन में समाज को एकजुट रहने का संदेश दिया । उन्होंने कहा कि समाज के हित में सभी को संगठित होकर कार्य करना चाहिए तथा किसी भी परिस्थिति या समस्या के समय एकजुटता ही सबसे बड़ी शक्ति होती है । स्वामी जी ने सनातन धर्म की परंपराओं का आवाहन करते हुए कहा कि ब्राह्मण समाज का मूल स्वरूप ज्ञान और शक्ति का संतुलन है—एक हाथ में शास्त्र और एक हाथ में शस्त्र आवश्यक है । वर्तमान समय में समाज और धर्म की रक्षा हेतु दोनों का महत्व आवश्यक है ।

भगवान परशुराम जयंती के इस पावन अवसर पर विप्र संप्रदाय द्वारा विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया ।
उपस्थित जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य विप्रजन
कार्यक्रम में श्रीमहंत रामभूषण दास जी महाराज (शांतिकुटी आश्रम) , पंडित योगेश दुबे (मृत्युंजय आश्रम) , रामनरेश शास्त्री (मार्कंडेय आश्रम) , पंडित उत्तम द्विवेदी , पंडित नंदन द्विवेदी , पंडित धर्मेंद्र द्विवेदी , पंडित कान्हा द्विवेदी , पंडित रुपेश द्विवेदी , पंडित प्रकाश द्विवेदी (विक्की) , पंडित कमलेश द्विवेदी , पंडित विनायक द्विवेदी , पंडित अंबिका प्रसाद तिवारी , पंडित कार्तिक द्विवेदी , पंडित आकाश द्विवेदी , पंडित सुशील शुक्ला , पंडित धनंजय तिवारी , पंडित श्रवण कुमार उपाध्याय , पंडित महेश्वर द्विवेदी , पंडित राजेश पाठक , पंडित अखिलेश पाठक , पंडित उमाशंकर मिश्रा , पंडित अनिल शुक्ला , पंडित राजहंस तिवारी , पंडित अरविंद गौतम , पंडित ओमप्रकाश गौतम , पंडित शक्ति शरण पांडेय , पंडित मुनीष पांडेय , पंडित रोहित लाल त्रिपाठी , पंडित लखन द्विवेदी , पंडित रविशंकर तिवारी , पंडित राधेश्याम उपाध्याय , पंडित पाण्डेय जी (श्री यंत्र मंदिर) , पंडित गजानंद गर्ग , पंडित संदीप जोशी , पंडित उमाशंकर पाण्डेय मुन्नू , पंडित जुगुल द्विवेदी , पंडित श्रेयांक द्विवेदी , पंडित अभिषेक पांडेय सहित सैकड़ों की संख्या में विप्रजन उपस्थित रहे ।
कार्यक्रम में संतजन , विद्वान एवं श्रद्धालुओं की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को और अधिक भव्य एवं सफल बनाया ।

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