जयरामनगर सहकारी समिति में 19.64 लाख का गबन उजागर, 13 किश्तों में खातों से निकाली गई राशि

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रिपोर्टर ✒️ रूपचंद रॉय

बिलासपुर । सेवा सहकारी समिति मर्यादित जयरामनगर में वित्तीय अनियमितता का बड़ा मामला सामने आया है। जांच में 19 लाख 64 हजार रुपए के गबन का खुलासा हुआ है, जिसे अलग-अलग तिथियों में 13 बार खातों से निकाला गया।

जांच प्रतिवेदन के अनुसार समिति के दो खातों—सेविंग खाता क्रमांक 606007042354 और रिवाल्विंग खाता क्रमांक 106003870399—से यह राशि निकाली गई।

सेविंग खाते से 5 बार निकासी
जांच में सामने आया कि 15 दिसंबर 2025 को पहली बार सेविंग खाते से निकासी की गई। इस दौरान 22 माह के लंबित वेतन के नाम पर प्रभारी प्रबंधक संतोष आनंद द्वारा दो बार में 1.76 लाख और 1.54 लाख रुपए निकाले गए।

इसके बाद 22 दिसंबर को डनेज, सूतली और ईंट-भूंसी के नाम पर 2.65 लाख रुपए तथा 30 दिसंबर को भवन मरम्मत और पुट्टी-पोताई के नाम पर 2.70 लाख रुपए आहरित किए गए।
24 फरवरी 2026 को बिना किसी स्पष्ट कार्यवाही के 40 हजार रुपए और निकाले गए। इस प्रकार सेविंग खाते से कुल 5 बार राशि आहरित की गई।

रिवाल्विंग खाते से 8 बार निकासी
रिवाल्विंग खाते से पहली निकासी 30 दिसंबर 2025 को 1.30 लाख रुपए की हुई।
इसके बाद 03 जनवरी 2026 को दो बार में 2.80 लाख रुपए अज्ञात खाते में ट्रांसफर और 1.40 लाख रुपए नगद निकाले गए।

31 जनवरी को 1 लाख रुपए, 04 फरवरी को दो बार में 1.40 लाख और 2 लाख रुपए, 24 फरवरी को 43 हजार रुपए तथा 03 मार्च को 26 हजार रुपए निकाले गए।
इस प्रकार इस खाते से कुल 8 बार में राशि निकाली गई।

धान परिवहन में शून्य शॉर्टेज, फिर भी भुगतान नहीं
मामले का एक अहम पहलू यह है कि धान खरीदी प्रभारी वीरेन्द्र टंडन द्वारा 69,490 क्विंटल धान का परिवहन बिना किसी शॉर्टेज के पूरा किया गया। इसके बावजूद उन्हें केवल 1.63 लाख रुपए का प्रारंभिक भंडारण व्यय ही दिया गया, जबकि शेष राशि खातों से निकाल ली गई।

जांच में आर्थिक अपराध की पुष्टि
जांच अधिकारी गोधुली वर्मा ने इस मामले को गंभीर आर्थिक अपराध मानते हुए 19.64 लाख रुपए की वसूली या एफआईआर दर्ज करने तथा प्रभारी प्रबंधक संतोष आनंद की तत्काल बर्खास्तगी की अनुशंसा की है।

इस संबंध में उप आयुक्त सहकारिता द्वारा 20 अप्रैल 2026 को प्राधिकृत अधिकारी को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

कार्रवाई पर टिकी निगाहें
अब यह देखना अहम होगा कि प्रशासन इस गंभीर वित्तीय गड़बड़ी पर कितनी तेजी और सख्ती से कार्रवाई करता है। यह मामला न केवल सहकारी समितियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत को भी उजागर करता है।

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