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स्कूल खुलने के बजाय जड़ेंगे ताला, गांव वालो का प्रशासन को अल्टीमेटम…

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शिक्षक के लिए तरस रहा, प्राथमिक विद्यालय, बच्चों का भविष्य अंधकार में…
मामला प्रशासन के संज्ञान में, स्थिति जस की तस..
मुंगेली । मुुंगेली जिला मुख्यालय से महज 05 किमी दूर ग्राम पंचायत सुरदा, विगत 04 वर्षों से शिक्षक के लिए तरस रहा है, वहां पदस्थ प्रधान पाठक इतने ही समय अर्थात 04 वर्षों से प्राथमिक शाला करही में संलग्न है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले 01 वर्ष से लगातार शिक्षक की मांग को लेकर कलेक्टर के समक्ष आवेदन दे चुके हैं मगर आज दिनांक तक स्कूल एक ही शिक्षक के भरोसे संचालित किया जा रहा है। ऐसे में बच्चों का भविष्य अंधकार में नजर आ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि इस मामले से प्रशासन को कई बार अवगत कराया जा चुका है इसके बावजूद कार्यवाही सिर्फ कागजों तक ही सीमित है। प्राथमिक शाला सुरदा में पदस्थ प्रधान पाठक संजय उपाध्याय निलंबित होने के बाद पुनः मिलीभगत कर प्राथमिक शाला करही में ही अपनी पदस्थापना करा लिये हैं।
शिकायत में आगे उल्लेख है कि वर्तमान में उक्त स्कूल एक महिला शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहा है जबकि वहां बच्चों की संख्या 58 है, ऐसी स्थिति में पढाई होने की कल्पना करना किसी छलावे से कम नहीं है, गुणवत्तायुक्त शिक्षा का सपना देखना, मानो दिन में तारे दिखने के समान नजर आ रहा है। बहरहाल ग्रामवासियों ने जिला प्रशासन को पुनः आवेदन देकर प्रधान पाठक को मूल शाला भेजने की मांग की है, मांग पूर्ण नहीं होने की स्थिति में स्कूल भवन में ताला जड़ने का अल्टीमेटम भी दिया है।

गुणवत्तायुक्त शिक्षा कैसे संभव..??

प्राथमिक शिक्षा बच्चों की मानसिक, बौद्धित क्षमता का आधार स्तम्भ है ऐसे में प्राथमिक स्कूल में 58 बच्चे, 01 शिक्षक के भरोसे कैसे पढ़ पाएंगे, उनमें बौद्धिक क्षमता तो बहुत दूर की बात है, ये बच्चे खुद का नाम लिख पढ़ लें यही बहुत बड़ी बात है। ऐसे में प्रशासन को शीघ्र ही स्कूल में शिक्षक की व्यवस्था करनी चाहिए।

एक प्रधान पाठक को मूल शाला में कैसे भेज नही पा रहा प्रशासन

विगत 04 वर्षों से प्रधान पाठक संजय उपाध्याय दूसरे स्कूल में संलग्न है। जबकि उन्हे अपनी मूल शाला, प्राथमिक शाला सुरदा में पदस्थ होना था, ऐसे में अब ग्रामीण कलेक्टर कार्यालय के चक्कर लगाने को मजबूर हैं, यह पूरा मामला कलेक्टर मुंगेली के संज्ञान में है, बार बार आवेदन देने के बाद भी अगर एक प्रधान पाठक अपनी मूल शाला में उपस्थित नहीं हो पा रहा है, तो यह चिंता का विषय है।

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