तखतपुर में पागल कुत्ते का आतंक, 17 लोग घायल—नगर में दहशत का माहौ लमंडी चौक से देवांगनपारा तक दो घंटे में कई लोगों को बनाया शिकार, स्वास्थ्य केंद्र में सभी का उपचार; प्रशासन की सुस्ती पर उठे सवाल
बिलासपुर/तखतपुर। विकासखंड तखतपुर में शुक्रवार सुबह एक पागल कुत्ते के हमले से नगर में अफरा-तफरी मच गई। महज दो घंटे के भीतर कुत्ते ने अलग-अलग मोहल्लों में हमला कर बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और युवाओं सहित 17 लोगों को घायल कर दिया। घटना के बाद पूरे नगर में दहशत का माहौल बन गया और लोग घरों से बाहर निकलने से कतराने लगे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सुबह करीब 8 से 10 बजे के बीच मंडी चौक, देवांगनपारा, ठाकुरीकापा और तमेरपारा क्षेत्रों में कुत्ते ने अचानक राह चलते लोगों पर हमला करना शुरू कर दिया। शुरुआत में लोगों को स्थिति का अंदाजा नहीं हुआ, लेकिन कुछ ही देर में एक के बाद एक कई लोग कुत्ते के शिकार होते गए। देखते ही देखते दर्जनों लोग घायल हो गए और इलाके में हड़कंप मच गया।
घटना की जानकारी फैलते ही स्थानीय लोग एक-दूसरे को सतर्क करने लगे। कई लोगों ने फोन और संदेशों के जरिए आसपास के क्षेत्रों में सूचना पहुंचाई, लेकिन तब तक कुत्ता कई लोगों को काट चुका था। घायलों को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तखतपुर पहुंचाया गया, जहां इलाज के लिए भीड़ लग गई।
कुत्ते के हमले में घायल होने वालों में सुरेंद्र देवांगन (52), मान सिंह (35), जगदीश सिंह सिंगरौल (35), मिथलेश कुमार पटेल (43), प्रभात पटेल (8), भावेश ठाकुर (8), साहिल मनहर (25), शिव वर्मन (12), सूर्य प्रकाश दिवाकर (35), दसरू साहू (47), अंशु बघेल (13), बल्लू साहू (36), धनिश केवट (16), सरोज ध्रुव (45) और ऋषभ (8) सहित अन्य लोग शामिल हैं। सभी घायलों को प्राथमिक उपचार दिया गया।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तखतपुर में कुल 17 डॉग बाइट मरीजों का उपचार किया गया। डॉक्टरों ने सभी मरीजों को एंटी-रेबीज वैक्सीन और आवश्यकतानुसार इम्यूनोग्लोबिन लगाया। उपचार के बाद सभी की स्थिति सामान्य पाई गई और उन्हें घर भेज दिया गया। स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों को निर्धारित समय पर पांचों टीके लगवाने की सख्त हिदायत दी है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शुभा गरेवाल ने बताया कि मरीज अलग-अलग समय पर अस्पताल पहुंचे, जिससे प्रत्येक को समय पर उपचार मिल सका। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी-रेबीज वैक्सीन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।
घटना के बाद भी नगर प्रशासन की ओर से तत्काल कोई ठोस कार्रवाई नहीं किए जाने पर स्थानीय लोगों में आक्रोश देखा गया। नागरिकों का कहना है कि आवारा कुत्तों की समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन प्रशासन इसे लेकर गंभीर नहीं है। लोगों ने मांग की है कि ऐसे खतरनाक कुत्तों को पकड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए और भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।
इस घटना ने एक बार फिर नगर में आवारा पशुओं की समस्या और प्रशासनिक लापरवाही को उजागर कर दिया है। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की तत्परता से सभी घायल सुरक्षित हैं, लेकिन नगर में भय और चिंता का माहौल अब भी बना हुआ है।

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