गोड़ाडीह में नल-जल योजना में भ्रष्टाचार के आरोप

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रिपोर्टर ✒️ रूपचंद रॉय

ग्रामीणों ने उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की उठाई मांग

पचपेड़ी। क्षेत्र के ग्राम पंचायत गोड़ाडीह में संचालित नल-जल योजना (जल जीवन मिशन) को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों ने योजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

घटिया निर्माण सामग्री उपयोग करने का आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि योजना के तहत गांव में पाइपलाइन बिछाने, पानी टंकी निर्माण एवं घर-घर नल कनेक्शन देने का कार्य संबंधित ठेकेदार द्वारा कराया गया, लेकिन पूरे कार्य में भारी लापरवाही बरती गई। लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य में घटिया गुणवत्ता की पाइप और अन्य सामग्री का उपयोग किया गया, जिसके कारण पाइपलाइन जगह-जगह टूट रही है और पानी सप्लाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

ग्रामीणों के अनुसार कई स्थानों पर पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने से पानी बहकर बर्बाद हो रहा है, जबकि गांव के लोगों को पर्याप्त पेयजल नहीं मिल पा रहा।

आधे गांव तक नहीं पहुंचा नल कनेक्शन

मिली जानकारी के अनुसार गांव के 50 प्रतिशत से अधिक घरों तक अब तक नल कनेक्शन नहीं पहुंच पाया है। ग्रामीणों का आरोप है कि कागजों में कार्य पूर्ण दर्शाकर भुगतान निकाल लिया गया, जबकि जमीनी स्तर पर योजना अधूरी है।

लोगों ने बताया कि नियमित जलापूर्ति नहीं होने से उन्हें आज भी पेयजल के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। कई घरों तक पाइपलाइन में पर्याप्त दबाव नहीं बनने के कारण पानी नहीं पहुंच पा रहा है।

अधिकारियों और ठेकेदार की मिलीभगत का आरोप

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बिना मानक के अनुरूप कार्य पूर्ण किए ही ठेकेदार और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से शासन की लाखों-करोड़ों रुपये की राशि निकाल ली गई। उनका कहना है कि योजना का उद्देश्य ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना था, लेकिन भ्रष्टाचार और लापरवाही के कारण लोगों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल रहा।

जांच कर कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते जांच कर दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई तो ग्रामीण आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

ग्रामीणों ने मांग की है कि योजना की गुणवत्ता की तकनीकी जांच कराई जाए तथा भ्रष्टाचार में शामिल ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि शासन की योजनाओं में पारदर्शिता बनी रहे और आम लोगों को शुद्ध पेयजल सुविधा का लाभ मिल सके।

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