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आधुनिक संसाधनों और वैज्ञानिक खेती से किसान अमन प्रसाद ने रची सफलता की नई इबारत

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समय पर खाद-बीज मिलने से कृषि को मिली नई उड़ान

रायपुर । दृढ़ इच्छाशक्ति, जागरूकता और आधुनिक कृषि तकनीकों का समन्वय किसी भी किसान की तकदीर बदल सकता है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के गौरेला विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत लालपुर के प्रगतिशील किसान अमन प्रसाद आज इसकी जीवंत मिसाल बन चुके हैं। लगभग 7 एकड़ 50 डिसमिल कृषि भूमि के स्वामी अमन प्रसाद न केवल पारंपरिक फसलों का बंपर उत्पादन ले रहे हैं, बल्कि अपनी बाड़ी में उन्नत किस्म की सब्जियों की खेती कर अतिरिक्त मुनाफा भी कमा रहे हैं। खेती के प्रति उनके समर्पण और नवाचारों को अपनाने की ललक ने उन्हें क्षेत्र के अन्य अन्नदाताओं के लिए एक प्रेरणास्रोत बना दिया है। अमन प्रसाद नियमित रूप से कृषि विभाग के संपर्क में रहते हैं और सहकारी समिति के माध्यम से मिलने वाली शासकीय योजनाओं व सुविधाओं का भरपूर लाभ उठा रहे हैं, जिसके सकारात्मक परिणाम उनकी फसलों में साफ दिखाई देते हैं।

समय पर संसाधन मिलने से आसान हुई राह हाल ही में अमन प्रसाद ने आगामी खरीफ सीजन की तैयारियों के लिए लालपुर सहकारी समिति से खाद और बीज लेने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने बताया कि इस वर्ष कृषि विभाग और समिति के तालमेल से उन्हें पर्याप्त मात्रा में उच्च गुणवत्तायुक्त खाद और प्रमाणित बीज बेहद आसानी से मिल गए। समय पर इन संसाधनों की उपलब्धता ने उनकी खेती की राह को निष्कंटक बना दिया, जिससे वे बुआई और अन्य कृषि कार्यों की सटीक प्लानिंग कर सके।

पारदर्शी व्यवस्था की सराहना समिति की कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए अमन प्रसाद ने कहा कि खाद-बीज वितरण की पूरी प्रक्रिया अत्यंत व्यवस्थित और पारदर्शी है। किसानों को अपनी जरूरत की सामग्रियां बिना किसी भागदौड़ या परेशानी के मिल रही हैं, जिससे उनके समय और श्रम दोनों की भारी बचत हो रही है। प्रगतिशील किसान अमन प्रसाद ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण कृषि आदानों (खाद-बीज) का सही समय पर मिलना ही खेती की सफलता की पहली सीढ़ी है। इससे न केवल उत्पादन लागत नियंत्रित रहती है, बल्कि फसल की गुणवत्ता और उपज में भी भारी वृद्धि होती है। यदि हर किसान को समय पर संसाधन और सही तकनीकी मार्गदर्शन मिले, तो कृषि को एक बेहद मुनाफे का सौदा बनाया जा सकता है।

आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम अमन प्रसाद की यह सफलता साबित करती है कि अगर परंपरागत अनुभवों के साथ आधुनिक एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण को जोड़ा जाए, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव लाया जा सकता है। आज वे खुद आत्मनिर्भर होने के साथ-साथ अपने आस-पास के दर्जनों गांवों के किसानों को भी कृषि विभाग की योजनाओं से जुड़ने और आधुनिक तौर-तरीके अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। ग्रामीण विकास और कृषि क्षेत्र में उनका यह प्रयास वास्तव में अनुकरणीय है।

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