सरकारी कर्मचारियों और विद्यार्थियों के हित में जनप्रतिनिधियों से समर्थन की मांग गवर्नमेंट एम्पलाइज वेलफेयर एसोसिएशन ने सांसदों-विधायकों से केंद्र व राज्य सरकार को पत्र लिखने की अपील की
रायपुर। Government Employees Welfare Association Chhattisgarh ने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों एवं शासकीय सेवकों के हित में लंबित प्रमुख मांगों को लेकर राज्य के सभी सांसदों एवं विधायकों से समर्थन पत्र जारी करने की मांग की है। संगठन ने जनप्रतिनिधियों से अपील की है कि वे इन मुद्दों को राज्य एवं केंद्र सरकार के समक्ष प्रभावी ढंग से उठाएं, ताकि जल्द ठोस निर्णय लिया जा सके।
संगठन के प्रदेश अध्यक्ष कृष्णकुमार नवरंग, उपप्रांताध्यक्ष भोला राम मरकाम तथा महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष संगीता पाटले ने संयुक्त रूप से कहा कि वर्तमान में कई नियम एवं प्रावधान आम नागरिकों, विद्यार्थियों और शासकीय कर्मचारियों के लिए व्यावहारिक कठिनाइयां पैदा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन विसंगतियों को दूर करने के लिए शीघ्र नीति-स्तरीय निर्णय आवश्यक है।
संगठन ने प्रमुख मांगों में शासकीय योजनाओं एवं विद्यार्थियों को मिलने वाली छात्रवृत्ति के लिए निर्धारित 2.5 लाख रुपये वार्षिक आय सीमा को बढ़ाकर 12 लाख रुपये करने की मांग रखी है। पदाधिकारियों का कहना है कि दशकों पुरानी यह आय सीमा वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप नहीं है, जिसके कारण बड़ी संख्या में पात्र विद्यार्थी योजनाओं के लाभ से वंचित हो रहे हैं।

एसोसिएशन ने तमिलनाडु मॉडल का उल्लेख करते हुए आरक्षण व्यवस्था को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करने तथा पदोन्नति में आरक्षण लागू करने की मांग भी उठाई है। संगठन का कहना है कि इससे आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों को सेवा में न्यायसंगत अवसर मिल सकेगा।
शिक्षा और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर भी संगठन ने अपनी चिंता व्यक्त की। प्रवेश एवं भर्ती परीक्षाओं में साक्षात्कार (इंटरव्यू) प्रणाली समाप्त करने की मांग करते हुए कहा गया कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और चयन प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष होगी।
संगठन ने शिक्षक एलबी संवर्ग के लिए पेंशन भुगतान में पूर्व सेवा अवधि जोड़ने की मांग करते हुए कहा कि पेंशन की गणना नियुक्ति तिथि से की जानी चाहिए। इसके अलावा पूर्व में नियुक्त शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग भी रखी गई।
एसोसिएशन ने संविदा, अनियमित एवं प्लेसमेंट आधारित नियुक्तियों पर रोक लगाकर नियमित पदों पर सीधी भर्ती करने की मांग भी दोहराई। संगठन का कहना है कि अस्थायी नियुक्तियां कर्मचारियों के भविष्य को असुरक्षित बनाती हैं और कार्यक्षमता पर भी असर डालती हैं।
संगठन के प्रदेश प्रवक्ता नरेंद्र जांगड़े, प्रदेश महामंत्री बसंत बंजारे, प्रदेश सचिव राधेश्याम टंडन, सनत बंजारे एवं दिनेश घोषले ने सभी जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया है कि वे इन जनहितकारी मांगों के समर्थन में राज्य एवं भारत सरकार को पत्र प्रेषित कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित कराने में सहयोग करें।
प्रदेश अध्यक्ष कृष्णकुमार नवरंग ने कहा कि संगठन कर्मचारियों, विद्यार्थियों और वंचित वर्गों के अधिकारों की लड़ाई आगे भी मजबूती से जारी रखेगा और मांगों के समाधान तक आवाज उठाता रहेगा।

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