धमतरी से उठी हरित क्रांति की नई गूंज: छत्तीसगढ़ में आकार ले रहा है पहला ‘कार्बन कृषि’ मॉडल
रायपुर । कार्बन कृषि एक ऐसा कृषि मॉडल है जो वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड को कम करके मिट्टी और पौधों में जमा करने पर केंद्रित है। इसका मुख्य उद्देश्य जलवायु परिवर्तन से लड़ना और किसानों को कार्बन क्रेडिट बेचकर अतिरिक्त आय प्रदान करना है।
धमतरी, छत्तीसगढ़ का पहला मॉडल ‘कार्बन कृषि’ जिला बनने की राह पर धमतरी जिला जो अब तक अपनी समृद्ध लोक संस्कृति और धान की बंपर पैदावार के लिए जाना जाता था,अब देश के कृषि इतिहास में एक नया और स्वर्णिम अध्याय लिखने जा रहा है। बदलती जलवायु और पर्यावरण की चुनौतियों के बीच,धमतरी ने एक ऐसी करवट ली है जो न केवल मिट्टी की सेहत सुधारेगी, बल्कि धरती को झुलसने से भी बचाएगी। जिला प्रशासन और जलवायु प्रौद्योगिकी क्षेत्र की अग्रणी संस्था 'प्रिथु' (PRITHU) के बीच हुआ हालिया समझौता महज एक सरकारी कागज़ नहीं,बल्कि छत्तीसगढ़ के किसानों को वैश्विक कार्बन बाजार से जोड़ने वाला एक ऐतिहासिक सेतु है।इस अनूठी साझीदारी के साथ ही धमतरी, छत्तीसगढ़ का पहला मॉडल 'कार्बन कृषि' जिला बनने की राह पर अग्रसर हो चुका है।
धरती का कायाकल्प: दो चरणों में बदलेगी खेती की सूरत इस महा-अभियान के तहत धमतरी के खेतों को एक नए वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सींचा जाएगा। पूरी परियोजना को दो रणनीतिक चरणों में विभाजित किया गया है, जिसके दायरे में लगभग 1 लाख 10 हजार हेक्टेयर का विशाल कृषि क्षेत्र आएगा। सबसे पहले लगभग 80 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में 'मृदा कार्बन संवर्धन' (Soil Organic Carbon) परियोजना चलाई जाएगी। इसका सीधा उद्देश्य रासायनिक खादों के कारण बेजान हो रही मिट्टी में जैविक कार्बन की मात्रा को बढ़ाना है। जब मिट्टी में कार्बन बढ़ेगा, तो उसकी पानी सोखने की क्षमता और प्राकृतिक उपजाऊपन में जादुई सुधार देखने को मिलेगा।

धान का कटोरा कहे जाने वाले इस क्षेत्र के 30 हजार हेक्टेयर मे’ऑल्टरनेट वेटिंग एंड ड्राइंग’ (AWD) तकनीक अपनाई जाएगी। अमूमन माना जाता है कि धान को हर वक्त पानी में डूबा रहना चाहिए, लेकिन यह तकनीक इस मिथक को तोड़ती है। यह तकनीक फसलों को जरूरत के मुताबिक पानी देकर न सिर्फ जल संकट से निपटेगी, बल्कि धान के खेतों से निकलने वाली मीथेन जैसी हानिकारक गैसों के उत्सर्जन को भी रोकेगी। *पर्यावरण संरक्षण से समृद्धि का सफर: 250 करोड़ रुपए का 'ग्रीन रिटर्न* इस पूरे अभियान की सबसे खूबसूरत बात यह है कि यह पर्यावरण को सुधारने के साथ-साथ सीधे तौर पर किसानों की आर्थिक समृद्धि का जरिया बन रहा है। प्रिथु संस्था के सह-संस्थापक श्री प्रबल तोमर के अनुसार, संस्था अगले तीन वर्षों में धमतरी में लगभग 5 करोड़ रुपये का जमीनी निवेश करने जा रही है। यह राशि किसी फैक्टरी को लगाने में नहीं, बल्कि ग्रामीण युवाओं के हुनर को तराशने, रोजगार के नए अवसर पैदा करने और किसानों को हाई-टेक बनाने में खर्च होगी।
किसान सिर्फ अन्नदाता नहीं, बल्कि ‘पर्यावरण रक्षक’ बनकर भी कमाएगा जब धमतरी के किसान इस पर्यावरण-अनुकूल पद्धति से खेती करेंगे, तो उससे 'कार्बन क्रेडिट' पैदा होंगे।परियोजना के पूरे जीवनचक्र में इन कार्बन क्रेडिट्स को वैश्विक बाजारों में बेचकर किसानों के खातों में लगभग 250 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय आने की संभावना है। यानी अब धमतरी का किसान सिर्फ अन्नदाता नहीं, बल्कि 'पर्यावरण रक्षक' बनकर भी कमाएगा।
विकास में एक नए युग की शुरुआत इस दूरगामी पहल को लेकर जिला प्रशासन बेहद उत्साहित और गंभीर है। जिला कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने इसे जिले के विकास में एक नए युग की शुरुआत माना है। उनका कहना है कि धमतरी हमेशा से नवाचारों को अपनाने में आगे रहा है और यह परियोजना सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को हासिल करने में मील का पत्थर साबित होगी। वहीं, कृषि उप संचालक का मानना है कि इस पहल से हमारे पारंपरिक किसानों को 'कार्बन फाइनेंस' जैसे आधुनिक और वैश्विक विषयों की व्यावहारिक समझ मिलेगी। धमतरी का यह 'ग्रीन मॉडल' आने वाले समय में न केवल छत्तीसगढ़ के बाकी जिलों के लिए कृषि क्षेत्र में एक अनुकरणीय और प्रेरक साबित होगा।

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