​डिजिटल क्रांति की राह पर वनांचल- नारायणपुर के अंतिम छोर पर बसे ग्राम डुंगा पहुंची राजस्व टीम, किसानों का हुआ ‘एग्री स्टैक’ पंजीयन

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कलेक्टर के निर्देश पर दूरस्थ गांवों में चल रहा विशेष अभियान; पारदर्शी कृषि सेवाओं के लिए तैयार हो रहा डिजिटल डेटाबेस

रायपुर । शासन की महत्वाकांक्षी एग्री स्टैक योजना के तहत अब प्रदेश के दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों के किसानों को डिजिटल पहचान देने की कवायद तेज हो गई है। इसी कड़ी में कलेक्टर नारायणपुर के विशेष निर्देशानुसार राजस्व विभाग की टीम जिले के अंतिम छोर पर स्थित ग्राम डुंगा पहुंची। टीम ने वहां शिविर लगाकर किसानों का सफलतापूर्वक एग्री स्टैक पंजीयन किया, जिससे ग्रामीणों में भारी उत्साह देखा गया। अभियान के पहले ही दिन गांव के 10 प्रमुख किसानों का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन पूरा कर लिया गया है।

एकीकृत डिजिटल रिकॉर्ड किया जा रहा है तैयार ​ राजस्व विभाग के अधिकारियों ने ग्रामीणों को चौपाल लगाकर इस योजना के दूरगामी लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि ​डिजिटल रिकॉर्ड के माध्यम से किसानों की भूमि, फसल और कृषि संबंधी समस्त जानकारियों का एक एकीकृत डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। एग्री स्टैक से प्रत्येक किसान की एक विशिष्ट डिजिटल पहचान बनेगी। इससे भविष्य में फसल बीमा, कृषि ऋण, सरकारी अनुदान और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर धान खरीदी जैसी योजनाओं का लाभ सीधे और बिना किसी विसंगति के मिलेगा।

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दस्तावेजों का स्थल पर ही सत्यापन तहसील के चक्करों से मिली मुक्ति, किसानों ने जताया आभार राजस्व कर्मियों ने मौके पर ही किसानों के भूमि अभिलेख, पहचान पत्र तथा अन्य आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन कर ऑनलाइन एंट्री सुनिश्चित की। ​ग्राम डुंगा जैसे पहुंचविहीन और वनांचल क्षेत्र में प्रशासन को अपने बीच पाकर ग्रामीण बेहद खुश नजर आए। कई किसानों ने खुद आगे बढ़कर अपने दस्तावेज सौंपे और पंजीयन कराया। ग्रामीणों का कहना है कि इस पहल से उन्हें ब्लॉक या तहसील मुख्यालय के चक्कर काटने से मुक्ति मिल गई है, जिससे उनका समय और पैसा दोनों बच रहा है।

पूरे जिले में चलाया जाएगा अभियान​ राजस्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह अभियान केवल ग्राम डुंगा तक सीमित नहीं रहेगा। जिले के अन्य सभी दूरस्थ और संवेदनशील गांवों में भी एग्री स्टैक पंजीयन के लिए लगातार टीमें भेजी जा रही हैं। शासन का लक्ष्य शत-प्रतिशत पात्र किसानों का डिजिटल डेटा तैयार करना है ताकि कोई भी किसान सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे।

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