हिंद कोल वाशरी विस्तार पर जनसुनवाई में सियासी घमासान, भाजपा प्रवक्ता बी.पी. सिंह ने जताया तीखा विरोध

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रिपोर्टर ✒️ रूपचंद रॉय

बिलासपुर/मस्तूरी। ग्राम पंचायत कर्रा में आयोजित मेसर्स Hind Energy की प्रस्तावित हिंद कोल वाशरी विस्तार परियोजना को लेकर आयोजित जनसुनवाई में राजनीतिक माहौल गरमा गया। एक ओर जहां कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं द्वारा परियोजना विस्तार को सहमति दिए जाने की चर्चा रही, वहीं दूसरी ओर भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता बी.पी. सिंह ने जनता के हित, पर्यावरण संरक्षण और जीव-जंतुओं की सुरक्षा का हवाला देते हुए विस्तार प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया।

जनसुनवाई के दौरान बी.पी. सिंह ने प्रशासन के समक्ष कई गंभीर मुद्दे उठाए और जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए परियोजना पर पुनर्विचार की मांग की।

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300 मीटर दायरे में कॉलेज, छात्रों के स्वास्थ्य पर खतरे की आशंका

मीडिया से चर्चा करते हुए बी.पी. सिंह ने कहा कि प्रस्तावित कोल वाशरी के मात्र 300 मीटर के दायरे में जे.के. इंजीनियरिंग कॉलेज और जे.के. फार्मेसी कॉलेज संचालित हैं, जहां हजारों छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। उनका कहना था कि कोयले की उड़ती धूल और औद्योगिक प्रदूषण का सीधा असर छात्रों के स्वास्थ्य और भविष्य पर पड़ सकता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय से क्षेत्र में प्रदूषण की समस्या बनी हुई है और इससे आसपास के रहवासी भी प्रभावित हो रहे हैं।

CPCB के निर्देशों का पालन नहीं होने का आरोप

भाजपा प्रवक्ता ने यह भी दावा किया कि करीब तीन वर्ष पूर्व केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), दिल्ली द्वारा इस संबंध में पत्र जारी कर वाशरी को बंद कर अन्यत्र स्थानांतरित करने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि अब तक इन निर्देशों का पालन नहीं किया गया, जिससे स्थानीय लोगों में असंतोष बढ़ा है।

6 वर्षों से मुआवजे की मांग कर रहे किसान

बी.पी. सिंह ने किसानों की समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि परियोजना से प्रभावित आसपास की 5 ग्राम पंचायतों के किसानों को पिछले 6 वर्षों से उचित मुआवजा नहीं मिला है।

उनका आरोप है कि कोल डस्ट और प्रदूषण के कारण किसानों की धान फसल काली पड़ रही है। परिणामस्वरूप कई बार सरकारी खरीद एजेंसियां गुणवत्ता मानकों का हवाला देकर फसल खरीदने से इनकार कर देती हैं, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

कांग्रेस की सहमति पर उठे सवाल

जनसुनवाई में कांग्रेस नेताओं की कथित सहमति पर भी भाजपा ने सवाल खड़े किए। बी.पी. सिंह ने कहा कि जब क्षेत्र की जनता प्रदूषण, स्वास्थ्य और आजीविका को लेकर चिंतित है, तब बिना व्यापक जनहित पर विचार किए किसी भी औद्योगिक विस्तार को समर्थन देना उचित नहीं माना जा सकता।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि विकास आवश्यक है, लेकिन वह स्थानीय नागरिकों के स्वास्थ्य, पर्यावरण और भविष्य की कीमत पर नहीं होना चाहिए।

जनहित बनाम औद्योगिक विस्तार की बहस तेज

हिंद कोल वाशरी विस्तार को लेकर हुई यह जनसुनवाई अब केवल औद्योगिक परियोजना का मामला नहीं रह गई है, बल्कि जनहित बनाम औद्योगिक विकास की बहस का केंद्र बन गई है। आने वाले दिनों में प्रशासन, प्रदूषण नियंत्रण एजेंसियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर सबकी नजर रहेगी।

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