विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन से बदली किसान अरुण की जिंदगी
निजी भूमि पर बने कूप से मिली सिंचाई की स्थायी सुविधा, 45 हजार से बढ़कर 1.50 लाख रुपये हुई वार्षिक आय
रायपुर । राज्य सरकार की ग्रामीण आजीविका और सिंचाई सशक्तिकरण की पहल किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के विकासखंड राजपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत पतरापारा निवासी किसान अरुण इसकी प्रेरक मिसाल बनकर सामने आए हैं। विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन के तहत उनकी निजी भूमि पर स्वीकृत कूप निर्माण ने वर्षा आधारित खेती को सालभर उत्पादन देने वाली सिंचित खेती में बदल दिया है। इससे न केवल उनकी कृषि उत्पादन क्षमता बढ़ी है, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति में भी उल्लेखनीय सुधार आया है।
बारिश पर निर्भर थी खेती, एक ही फसल से चलता था गुजारा
कुछ वर्ष पहले तक अरुण की खेती पूरी तरह मानसून पर निर्भर थी। समय पर पर्याप्त वर्षा होने पर धान की फसल अच्छी हो जाती थी, लेकिन बारिश कम होने पर खेत सूख जाते थे और मेहनत का पूरा लाभ नहीं मिल पाता था। सिंचाई का कोई स्थायी साधन उपलब्ध नहीं होने के कारण वे वर्ष में केवल एक फसल ही ले पाते थे। रबी सीजन की खेती लगभग असंभव थी, जिससे उनकी आय सीमित रह जाती थी और परिवार की जरूरतें पूरी करना भी चुनौतीपूर्ण था।


कूप निर्माण से बदली खेती की तस्वीर
वर्ष 2025-26 में विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन के अंतर्गत उनके खेत में निजी कूप निर्माण स्वीकृत हुआ। कूप बनने के बाद खेत तक स्थायी सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो गई और उनकी खेती का स्वरूप पूरी तरह बदल गया।

अब वे केवल धान की खेती तक सीमित नहीं हैं, बल्कि गेहूं और विभिन्न मौसमी सब्जियों का भी उत्पादन कर रहे हैं। उनकी बाड़ी में उगाई जा रही सब्जियां एक ओर परिवार की दैनिक जरूरतों को पूरा कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर अतिरिक्त आय का भी महत्वपूर्ण स्रोत बन गई हैं।
6.5 एकड़ भूमि में वर्षभर हो रही सिंचाई
कूप निर्माण के बाद लगभग 6.5 एकड़ कृषि भूमि में पूरे वर्ष सिंचाई संभव हो रही है। समय पर पानी उपलब्ध होने से फसलों की उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। खेती में लागत की तुलना में बेहतर उत्पादन और अधिक लाभ मिलने लगा है।
जहां पहले उनकी वार्षिक आय लगभग 45 हजार रुपये थी, वहीं अब बढ़कर लगभग 1 लाख 50 हजार रुपये तक पहुंच गई है। यह वृद्धि स्थायी सिंचाई व्यवस्था और बहुफसली खेती का प्रत्यक्ष परिणाम है।
बढ़ी आय से मजबूत हुई परिवार की आर्थिक स्थिति
अरुण बताते हैं कि पहले बारिश रुकते ही खेती को लेकर चिंता शुरू हो जाती थी, क्योंकि सिंचाई का कोई साधन नहीं था। अब अपने ही कूप से समय पर सिंचाई कर लेने के कारण खेती अधिक सुरक्षित और लाभकारी हो गई है।
उन्होंने बताया कि गेहूं और सब्जियों की खेती से आमदनी में लगातार वृद्धि हुई है। बढ़ी हुई आय के कारण अब वे बच्चों की पढ़ाई, खेती में नए निवेश तथा परिवार की अन्य आवश्यकताओं को पहले की तुलना में अधिक आसानी से पूरा कर पा रहे हैं। इससे उनके परिवार का जीवन स्तर भी बेहतर हुआ है।
किसानों के लिए नई उम्मीद बना विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन
अरुण ने शासन-प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन किसानों के लिए नई उम्मीद लेकर आया है। निजी भूमि पर कूप निर्माण जैसी योजनाओं से किसानों को स्थायी सिंचाई सुविधा मिल रही है, जिससे खेती अधिक सुरक्षित, लाभकारी और आत्मनिर्भर बन रही है।
उन्होंने कहा कि सिंचाई की स्थायी व्यवस्था मिलने से अब खेती मौसम की अनिश्चितताओं पर पूरी तरह निर्भर नहीं रही। इससे उत्पादन बढ़ा है, आय में वृद्धि हुई है और भविष्य के प्रति उनका विश्वास भी मजबूत हुआ है। यह पहल ग्रामीण किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर कृषि व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

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