प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना से बदल रही तस्वीर : शुभम राठौर का परिवार बना ऊर्जा आत्मनिर्भरता का उदाहरण
3 किलोवाट सोलर प्लांट से हर महीने बिजली बिल लगभग शून्य, केंद्र व राज्य सरकार की सब्सिडी से मिला बड़ा लाभ
रायपुर । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में स्वच्छ एवं सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए संचालित ‘पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना’ आमजन के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। इस योजना के माध्यम से ग्रामीण एवं शहरी परिवार अपनी छतों पर सोलर प्लांट स्थापित कर न केवल अपनी बिजली आवश्यकताओं की पूर्ति कर रहे हैं, बल्कि बिजली खर्च में भी उल्लेखनीय कमी ला रहे हैं। सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने की इस पहल से परिवारों को आर्थिक बचत के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग का अवसर भी मिल रहा है।
गौरेला विकासखंड के ग्राम पंचायत भदौरा निवासी शुभम राठौर ने इस योजना का लाभ उठाते हुए अपने घर की छत पर 3 किलोवाट क्षमता का सोलर प्लांट स्थापित किया है। सोलर प्लांट की स्थापना के बाद उनका परिवार अब अपनी दैनिक बिजली जरूरतों के लिए काफी हद तक सौर ऊर्जा पर निर्भर हो गया है। इसके चलते बिजली के मासिक खर्च में भी बड़ी कमी आई है।

पहले 400 से 500 रुपये आता था बिजली बिल
सोलर प्लांट लगने से पहले शुभम राठौर के परिवार को प्रत्येक महीने लगभग 400 से 500 रुपये तक बिजली बिल का भुगतान करना पड़ता था। घरेलू बिजली की जरूरतों के लिए नियमित रूप से बिजली का उपयोग होने के कारण हर महीने आने वाला बिल परिवार के लिए एक नियमित खर्च था। घर की छत पर 3 किलोवाट क्षमता का सोलर प्लांट स्थापित होने के बाद बिजली खर्च लगभग समाप्त हो गया है।

अब उनके घर में रोजमर्रा की बिजली की जरूरतें सौर ऊर्जा से पूरी हो रही हैं। इससे परिवार को बिजली बिल के रूप में होने वाले खर्च से बड़ी राहत मिली है और सौर ऊर्जा उनके दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है।
केंद्र और राज्य सरकार की सब्सिडी से मिली बड़ी मदद
पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत शुभम राठौर को सोलर प्लांट लगाने के लिए केंद्र सरकार की ओर से 78 हजार रुपये की सब्सिडी सीधे उनके बैंक खाते में प्राप्त हुई। इसके साथ ही राज्य सरकार की ओर से 30 हजार रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी भी प्रदान की गई। केंद्र और राज्य सरकार से मिली इस आर्थिक सहायता के कारण सोलर प्लांट की स्थापना उनके लिए काफी आसान हो गई।
सरकारी सब्सिडी का लाभ मिलने से सौर ऊर्जा अपनाने के लिए शुरुआती आर्थिक बोझ कम हुआ। योजना के माध्यम से मिलने वाली सहायता ने परिवार को अपने घर की छत पर सोलर प्लांट लगाने के लिए प्रोत्साहित किया।
जरूरत से अधिक बिजली ग्रिड में होती है शामिल
शुभम राठौर बताते हैं कि सोलर प्लांट लगने के बाद अब उन्हें हर महीने आने वाले बिजली बिल की चिंता नहीं रहती। उनके घर की छत पर स्थापित सोलर प्लांट से बिजली का उत्पादन होता है और इसी ऊर्जा का उपयोग घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करने में किया जाता है।
जब सोलर प्लांट से आवश्यकता से अधिक बिजली उत्पन्न होती है, तो अतिरिक्त बिजली ग्रिड में चली जाती है। इसका समायोजन बिजली बिल में किया जाता है। इस व्यवस्था से परिवार को बिजली खर्च कम करने के साथ अतिरिक्त बिजली के उपयोग का भी लाभ मिल रहा है।
स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम
शुभम राठौर का परिवार सौर ऊर्जा अपनाकर केवल आर्थिक बचत ही नहीं कर रहा है, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दे रहा है। सौर ऊर्जा प्रदूषण कम करने और पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता घटाने की दिशा में महत्वपूर्ण माध्यम है।
घर की छत पर सोलर प्लांट स्थापित करने से परिवार को अपनी बिजली जरूरतों के लिए वैकल्पिक और स्वच्छ ऊर्जा स्रोत मिला है। इससे ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की भावना भी मजबूत हुई है।
अन्य परिवारों के लिए बना प्रेरक उदाहरण
शुभम राठौर के परिवार की यह पहल बताती है कि सरकारी योजनाओं का सही तरीके से लाभ उठाकर आम परिवार भी ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। केंद्र और राज्य सरकार की सब्सिडी से सोलर प्लांट की स्थापना आसान होने के साथ नियमित बिजली खर्च में भी कमी लाई जा सकती है।
पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के माध्यम से घरों की छतों को ऊर्जा उत्पादन का माध्यम बनाने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है। शुभम राठौर का परिवार इस पहल का उदाहरण बनकर सामने आया है। उनका अनुभव दूसरे परिवारों को भी सौर ऊर्जा अपनाने और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करता है।

The News Related To The News Engaged In The www.apnachhattisgarh.com Web Portal Is Related To The News Correspondents The Editor Does Not Necessarily Agree With These Reports The Correspondent Himself Will Be Responsible For The News.
