एक जनवरी से राज्य के सभी अस्पतालों को डिजिटल करने का लक्ष्य लेकर करें काम: श्याम बिहारी जायसवाल

0
IMG-20260819-WA0624

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन कार्यशाला में डिजिटल हेल्थ सेवाओं की प्रगति की समीक्षा, छत्तीसगढ़ में 2.63 करोड़ नागरिकों के बने ABHA, 12 हजार से अधिक स्वास्थ्य संस्थान जुड़े

रायपुर, 19 अगस्त 2026। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने बुधवार को आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन कार्यशाला का शुभारंभ किया। छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में आयोजित आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) की मॉडल डिस्ट्रिक्ट इनिशिएटिव कार्यशाला में प्रदेश की डिजिटल हेल्थ सेवाओं की प्रगति और आगामी कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई।

कार्यशाला में बताया गया कि ABDM का सबसे नागरिक-केंद्रित हिस्सा ABHA यानी आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट है। इसके माध्यम से नागरिक अपनी जांच रिपोर्ट, प्रिस्क्रिप्शन और अन्य स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रख सकते हैं तथा अपनी सहमति से इन्हें डॉक्टरों के साथ साझा कर सकते हैं। छत्तीसगढ़ में अब तक 2.63 करोड़ नागरिकों के ABHA बनाए जा चुके हैं।

NTPC World Environment Day

डॉक्टरों और अस्पतालों की भी डिजिटल पहचान

स्वास्थ्य पेशेवरों के पंजीकरण के लिए बनाई गई हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री (HPR) से प्रदेश में 34 हजार से अधिक स्वास्थ्य पेशेवर जुड़ चुके हैं। वहीं हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री (HFR) के माध्यम से अस्पताल, क्लिनिक, लैब और ब्लड बैंक सहित 12 हजार से अधिक स्वास्थ्य संस्थान डिजिटल नेटवर्क से जुड़ गए हैं।

इस व्यवस्था के माध्यम से स्वास्थ्य संस्थानों और स्वास्थ्य पेशेवरों की डिजिटल पहचान स्थापित होने के साथ स्वास्थ्य सेवाओं के रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने में भी मदद मिलेगी।

क्लेम प्रोसेसिंग होगी आसान, कागजी निर्भरता घटेगी

कार्यशाला में बताया गया कि ABDM-सक्षम HMIS के प्रभावी उपयोग से मरीज का पूरा स्वास्थ्य रिकॉर्ड पंजीयन से लेकर उपचार और डिस्चार्ज तक डिजिटल रूप में दर्ज किया जा सकेगा। इससे मेडिकल रिकॉर्ड की जांच आसान होगी और क्लेम प्रोसेसिंग में लगने वाला समय भी कम होगा।

इसके साथ ही ऑडिट और वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने में डिजिटल रिकॉर्ड उपयोगी साबित होंगे। कागजी दस्तावेजों पर निर्भरता कम होने से स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और कार्यक्षमता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों पर विशेष जोर

छत्तीसगढ़ के बड़े भौगोलिक क्षेत्र और दुर्गम इलाकों को देखते हुए कार्यशाला में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ शहरों तक सीमित नहीं रखने पर विशेष जोर दिया गया। गांव, गरीब और अंतिम व्यक्ति तक डिजिटल स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करने को आगामी कार्ययोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया।

अधिकारियों को ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं मजबूत करने के निर्देश दिए गए।

डेटा सुरक्षा और नागरिकों की सहमति प्राथमिकता

कार्यशाला में वक्ताओं ने कहा कि ABDM को केवल एक आईटी परियोजना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह पूरे स्वास्थ्य तंत्र को बेहतर बनाने का माध्यम है। नागरिकों की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी की सुरक्षा, गोपनीयता और सहमति आधारित उपयोग को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया।

सात प्रमुख लक्ष्यों पर होगा काम

कार्यशाला में आगे के लिए सात प्रमुख लक्ष्यों पर विशेष रूप से काम करने की बात कही गई। इनमें शेष स्वास्थ्य संस्थानों को HFR से जोड़ना, अधिक डॉक्टरों एवं नर्सों को HPR से जोड़ना, ABHA के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना, HMIS का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना, स्वास्थ्य रिकॉर्ड की गुणवत्ता बढ़ाना, सरकारी एवं निजी स्वास्थ्य संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना तथा ग्रामीण क्षेत्रों तक डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना शामिल है।

एक जनवरी से ऑनलाइन व्यवस्था लागू करने का लक्ष्य

कार्यशाला को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग समय के साथ नई तकनीकों को अपनाने की दिशा में लगातार काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि जब तक विभाग के अधिकारी-कर्मचारी स्वयं नई तकनीकों और डिजिटल व्यवस्था की जानकारी से परिचित नहीं होंगे, तब तक बेहतर मॉनिटरिंग संभव नहीं होगी।

उन्होंने कहा कि विभाग लगातार प्रयास कर रहा है कि मरीजों के सभी उपचार संबंधी रिकॉर्ड ABHA से लिंक हों। इसके लिए निजी अस्पतालों से भी डाटा शेयर होना जरूरी है। डिजिटल सिस्टम के इस्तेमाल से विभाग की कार्यक्षमता में वृद्धि होगी और स्वास्थ्य सेवाओं की मॉनिटरिंग को बेहतर बनाया जा सकेगा।

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि आयुष्मान भारत योजना के नए कार्ड में अब ABHA आईडी को शामिल किया गया है। इससे मरीजों का डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड सुरक्षित और आसानी से उपलब्ध हो सकेगा। उन्होंने बताया कि अटल आरोग्य लैब की जांच रिपोर्ट अब सीधे मरीजों के मोबाइल पर भेजी जा रही है, जिससे मरीजों को अपनी जांच रिपोर्ट के लिए अनावश्यक इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि एक जनवरी से सभी कार्यों को ऑनलाइन करने के लक्ष्य को लेकर विभाग मिशन मोड में काम कर रहा है। इस दिशा में काफी हद तक सफलता मिली है और डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास आगे भी निरंतर जारी रहेगा।

कार्यशाला में स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया, एनएचए भारत सरकार के संचालक विक्रम पगारिया, राज्य स्वास्थ्य विभाग के आयुक्त सह संचालक संजीव झा सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advertisement Carousel

Latest News

error: Content is protected !!