वैज्ञानिक मछली पालन से आत्मनिर्भर बने युवा किसान विनय चंद्रवंशीप्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से मिली नई पहचान, लाखों की आय का उदाहरण

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रिपोर्टर ✒️ कमलेश सिंह

कवर्धा। जब सही सरकारी योजना, वैज्ञानिक सोच और निरंतर मेहनत एक साथ मिलती है, तो सफलता की राह स्वतः प्रशस्त हो जाती है। ऐसा ही प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया है कवर्धा विकासखंड के ग्राम भानपुर निवासी युवा किसान विनय चंद्रवंशी ने, जिन्होंने परंपरागत खेती के साथ वैज्ञानिक पद्धति से मछली पालन अपनाकर आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिखी है।

स्नातक शिक्षित विनय चंद्रवंशी ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का लाभ लेते हुए अपनी निजी भूमि पर मछली तालाब निर्माण के लिए आवेदन किया। आवश्यक जांच और प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद उनका चयन हुआ। इस परियोजना पर कुल 7 लाख रुपये की लागत आई, जिसमें से 2.80 लाख रुपये का अनुदान उन्हें डीबीटी के माध्यम से प्राप्त हुआ।

तालाब निर्माण के पश्चात मत्स्य पालन विभाग कबीरधाम द्वारा उन्हें वैज्ञानिक मछली पालन का प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन एवं नियमित निगरानी प्रदान की गई। पहले वर्ष विभाग की ओर से मछली बीज के साथ 3 हजार रुपये मूल्य का मछली आहार भी उपलब्ध कराया गया, जिससे उत्पादन की सशक्त शुरुआत हो सकी।

शासन के सहयोग और अपनी लगन के बल पर विनय चंद्रवंशी ने वर्ष 2023-24 में पंगेसियस मछली पालन से लगभग 4.60 लाख रुपये की आय अर्जित की। अब तक वे करीब 42 टन मछली का उत्पादन कर चुके हैं। वर्तमान में वे मत्स्य पालन के माध्यम से न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हैं, बल्कि अपने परिवार का बेहतर ढंग से भरण-पोषण भी कर रहे हैं।

उनकी सफलता आसपास के ग्रामीणों और युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन रही है, जो अब मत्स्य पालन को लाभकारी व्यवसाय के रूप में देखने लगे हैं। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का उद्देश्य मत्स्य क्षेत्र का समग्र विकास, रोजगार सृजन और मछुआरों की आय में वृद्धि करना है। योजना के अंतर्गत तालाब निर्माण, मछली बीज, आहार, प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाती है, जिससे ग्रामीण अंचलों में स्थायी आजीविका के अवसर सृजित हो रहे हैं।

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