बस्तर पर्यटन ने भरी नई उड़ान, वर्षों से लंबित योजनाओं को मिली गति प्राकृतिक धरोहरों पर बढ़ीं सुविधाएँ, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिला नया संबल

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रायपुर । प्राकृतिक सौंदर्य, झरनों की कलकल ध्वनि, घने वनों की हरियाली और समृद्ध जनजातीय संस्कृति से परिपूर्ण बस्तर अंचल अब पर्यटन विकास के नए दौर में प्रवेश कर चुका है। लंबे समय से जिन पर्यटन स्थलों के विकास की प्रतीक्षा की जा रही थी, वहाँ अब चरणबद्ध रूप से आधारभूत एवं आधुनिक सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। राज्य शासन एवं पर्यटन विभाग के समन्वित प्रयासों से बस्तर के पर्यटन परिदृश्य में सकारात्मक बदलाव स्पष्ट दिखाई देने लगा है।

प्रमुख स्थलों पर आधारभूत सुविधाओं का विस्तार

विश्व प्रसिद्ध , , सहित , , और जैसे पर्यटन क्षेत्रों में सड़क संपर्क को बेहतर किया गया है। पर्यटकों की सुविधा के लिए सुव्यवस्थित पार्किंग, पेयजल, आधुनिक शौचालय, विश्राम शेड, प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधों को सुदृढ़ किया गया है।
पर्यटकों को मार्गदर्शन देने हेतु सूचना केंद्र और हेल्प डेस्क की स्थापना की गई है। वहीं व्यू-पॉइंट, सेल्फी जोन और सौंदर्यीकरण कार्यों से पर्यटन स्थलों की भव्यता और आकर्षण में वृद्धि हुई है।

टूरिस्ट फैसिलिटेशन सेंटर और डिजिटल पहल

में स्थापित टूरिस्ट फैसिलिटेशन सेंटर के माध्यम से पर्यटकों को आवास, स्थानीय भ्रमण, गाइड सुविधा और अन्य आवश्यक जानकारियाँ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। ऑनलाइन बुकिंग, डिजिटल भुगतान और आधुनिक प्रचार माध्यमों के उपयोग से पर्यटन सेवाएँ पहले से अधिक सहज और पारदर्शी हुई हैं।

स्थानीय युवाओं को मिला रोजगार

पर्यटन विकास का सीधा लाभ स्थानीय युवाओं को रोजगार के रूप में मिला है। गाइड प्रशिक्षण, आतिथ्य सेवाएँ, साहसिक पर्यटन गतिविधियाँ और होम-स्टे योजनाओं से स्वरोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। साथ ही स्थानीय हस्तशिल्प, बेलमेटल कला, टेराकोटा एवं जनजातीय उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा मिलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिली है।

पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता पर फोकस

पर्यटन विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जा रही है। स्वच्छता अभियान, प्लास्टिक मुक्त क्षेत्र, हरित पट्टी विकास और जैव विविधता संरक्षण के प्रयासों से बस्तर की प्राकृतिक पहचान को सुरक्षित रखने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा

बस्तर की पहचान केवल प्राकृतिक स्थलों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी समृद्ध जनजातीय संस्कृति भी इसकी आत्मा है। , और लोकनृत्य आयोजनों के माध्यम से सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे देश-विदेश के पर्यटक बस्तर की अनूठी परंपराओं से रूबरू हो रहे हैं।

दीर्घकालीन मास्टर प्लान पर कार्य

पर्यटन विभाग द्वारा बस्तर के समग्र पर्यटन विकास के लिए दीर्घकालीन मास्टर प्लान के तहत योजनाबद्ध तरीके से कार्य किए जा रहे हैं। भविष्य में साहसिक पर्यटन, इको-टूरिज्म, वाइल्डलाइफ और धार्मिक पर्यटन को और सशक्त बनाने की दिशा में निरंतर पहल जारी है।

स्थानीय नागरिकों, पर्यटन व्यवसायियों और आगंतुकों ने इन विकास कार्यों पर संतोष व्यक्त करते हुए विश्वास जताया है कि आने वाले वर्षों में बस्तर न केवल प्रदेश, बल्कि देश के प्रमुख पर्यटन गंतव्यों में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करेगा।
नई ऊर्जा, नई सोच और समन्वित प्रयासों के साथ बस्तर का पर्यटन क्षेत्र निरंतर आगे बढ़ रहा है, जिससे पर्यटकों के अनुभव के साथ-साथ स्थानीय समाज और अर्थव्यवस्था को भी स्थायी लाभ मिलना तय है।

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