उज्जैन–बनारस की तर्ज पर आकार ले रहा भोरमदेव कॉरिडोरनिर्माण कार्य ने पकड़ी रफ्तार, पर्यटन मंडल अध्यक्ष नीलू शर्मा ने किया निरीक्षण


रिपोर्टर ✒️ कमलेश सिंह
कवर्धा। छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक और धार्मिक पर्यटन को नई पहचान देने की दिशा में भोरमदेव कॉरिडोर तेजी से आकार ले रहा है। उज्जैन के महाकाल लोक और बनारस कॉरिडोर की तर्ज पर विकसित किए जा रहे इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य इन दिनों तेज गति से चल रहा है। भोरमदेव मंदिर परिसर को सुव्यवस्थित, भव्य और विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की यह योजना आने वाले समय में प्रदेश के पर्यटन मानचित्र में मील का पत्थर साबित होगी।


भोरमदेव कॉरिडोर के भूमिपूजन के पश्चात छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा (कैबिनेट मंत्री दर्जा) ने निर्माण स्थल का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों और निर्माण एजेंसी के साथ पूरे परिसर का विस्तृत अवलोकन करते हुए कार्य की प्रगति, गुणवत्ता और डिजाइन की बारीकी से समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान निर्माण कार्य में तेजी देखकर उन्होंने संतोष जताया, वहीं कुछ बिंदुओं पर आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।

पर्यटन मंडल अध्यक्ष ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भोरमदेव कॉरिडोर का निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा में हर हाल में पूरा किया जाए और गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न हो। उन्होंने कहा कि यह परियोजना केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने का सशक्त माध्यम है। जिस प्रकार उज्जैन और बनारस में विकसित कॉरिडोर ने धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है, उसी तरह भोरमदेव कॉरिडोर भी श्रद्धालुओं और पर्यटकों को एक अद्भुत अनुभव प्रदान करेगा।
नीलू शर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखी जाए। साथ ही स्थानीय आवश्यकताओं, पर्यावरण संरक्षण और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को प्राथमिकता देते हुए कार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि भोरमदेव कॉरिडोर के पूर्ण होने से क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
पर्यटन मंडल अध्यक्ष ने बताया कि इस परियोजना से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। होटल, परिवहन, गाइड सेवा, हस्तशिल्प और अन्य सहायक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, जिससे क्षेत्र की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। भोरमदेव कॉरिडोर न केवल धार्मिक पर्यटन को नई दिशा देगा, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को देश-दुनिया तक पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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